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चीनी के बढ़ते भाव एथेनॉल की कीमतों पर डालेंगे असर, पेट्रोल ब्लेंडिंग पर कैसे हो सकता है असर?

चीनी की बढ़ती कीमतों से एथेनॉल उत्पादन प्रभावित; मिलों को चीनी बेचना पड़ा फायदेमंद, पेट्रोल मिश्रण पर पड़ेगा असर

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सुशील मिश्र   
Last Updated- August 04, 2026 | 2:44 PM IST

देश में उत्पादन में कमी, कम बारिश और त्योहारी मांग के चलते चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही है। चीनी के बढ़ते दाम काबू में रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात में रोक के साथ स्टॉक लिमिट भी लागू कर दिया है। इसके बावजूद चीनी की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से चीनी मिले एथेनॉल उत्पादन, में कमी आ सकती है ।

क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम?

भारत में उत्पादन में कमी, कम बारिश और त्योहारी मांग के चलते चीनी की खुदरा कीमतें बढ़कर 48 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। देशभर में चीनी की कीमतों में आपूर्ति की कमी के कारण लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। थोक बाजार में भाव 4,750 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। जून के अंत में महाराष्ट्र और कर्नाटक में एस-ग्रेड चीनी की एक्स-फ़ैक्टरी कीमत लगभग 3,850 रुपये प्रति क्विंटल थी । उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि, नए चीनी सीजन की शुरुआत तक कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। ऐसे में चीनी की ऊंची कीमतें भविष्य में चीनी उत्पादकों को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी या गन्ने का डायवर्जन करने से हतोत्साहित कर सकती हैं।

चीनी स्टॉक लिमिट का असर

त्योहारी सीज़न में महंगी हो सकती है चीनी त्योहारी सीज़न के दौरान चीनी की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी, बल्कि सरकार के पास अतिरिक्त बिक्री कोटा जारी करने की गुंजाइश भी सीमित रह जाएगी। चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए स्टॉक लिमिट लागू की है । सरकार के आदेश के मुताबिक, अब कोई भी चीनी डीलर किसी भी स्टॉक को 30 दिनों से ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख सकेगा। साथ ही अब एक समय पर किसी भी जगह 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने की भी अनुमति नहीं है। तय सीमा से ज्यादा स्टॉक जमा करने पर कार्रवाई की जाएगी । यह आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

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क्या बढ़ेगी एथेनॉल की कीमत?

एथेनॉल से ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही चीनी ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह का कहना है कि एथेनॉल की कीमतें लंबे समय से स्थिर हैं, जबकि 2022-23 में एथेनॉल कीमतों में अंतिम संशोधन के बाद से गन्ने की कीमतों में लगभग 16 प्रतिशत वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में चीनी मिलों के लिए एथेनॉल उत्पादन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रह गया है। इसके अलावा, इस वर्ष चीनी का भंडार भी कम है, जिससे चीनी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। मौजूदा एथेनॉल कीमतों पर एथेनॉल उत्पादन और भी कम लाभकारी हो जाएगा।

चीनी की मौजूदा कीमतों के रुझान को देखते हुए एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 में एथेनॉल के लिए चीनी का कम डायवर्जन होने की उम्मीद है। गन्ना, चीनी और एथेनॉल की वर्तमान कीमतें बनी रहती हैं, तो उद्योग गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल का उत्पादन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में एथेनॉल का उत्पादन केवल सी-हेवी शीरे से किया जाएगा।

एथेनॉल की कीमतों पर क्या होगा फैसला?

सरकार से एथेनॉल कीमत बढ़ाने की मांग विजेंद्र सिंह ने कहा कि एक एथेनॉल उत्पादक के रूप में हम वर्तमान स्थिति को लेकर चिंतित हैं। यदि अतिरिक्त चीनी उत्पादन होता है, तो लंबे समय में चीनी की कीमतों पर दबाव आ सकता है। सामान्यतः चीनी उद्योग हर वर्ष 25 से 35 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए करता है। यदि यह डायवर्जन बंद हो गया, तो बाजार में चीनी का उत्पादन और बढ़ जाएगा। संगठन सरकार से एथेनॉल की कीमत बढ़ाने की मांग कर रहा है। दीर्घकालिक नीति के रूप में अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल का उत्पादन जारी रहना चाहिए। यह नीति पहले ही अपनी उपयोगिता साबित कर चुकी है, जिससे गन्ना किसानों और चीनी उद्योग दोनों को लाभ हुआ है।

क्या चीनी का संकट बढ़ेगा?

चीनी उत्पादन कम रहने का अनुमान इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, चालू 2025-26 पेराई सीज़न में देश का कुल चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 285 लाख टन रह सकती है। लगातार दूसरे वर्ष उत्पादन खपत से कम रहने की स्थिति बन रही है। सीज़न की शुरुआत में उद्योग ने 309 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने की कमज़ोर फसल के कारण उत्पादन उम्मीद से काफी कम रहा चीनी का कम स्टॉक ने बढ़ाई चिंता चालू सीज़न की शुरुआत यानी 1 अक्टूबर 2025 को देश में लगभग 47 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक था। इसमें 279 लाख टन उत्पादन जोड़ने पर कुल उपलब्धता 326 लाख टन रही। घरेलू खपत 285 लाख टन और लगभग 8 लाख टन निर्यात के बाद 1 अक्टूबर 2026 को शुरुआती स्टॉक केवल 33 से 35 लाख टन रहने का अनुमान है, जो कई वर्षों के सबसे निचले स्तरों में माना जा रहा है।

First Published : August 4, 2026 | 2:32 PM IST