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महंगा कच्चा माल… फिर भी रिकॉर्ड कमाई! आखिर कंपनियां कर क्या रही हैं?

महंगे कच्चे माल और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद Hindustan Zinc, Tata Consumer, Apar Industries, Coromandel International और Jindal Steel ने जून तिमाही में मुनाफा कैसे बचाया

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- July 27, 2026 | 11:29 AM IST

पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन की दिक्कतें। पिछले कुछ महीनों से कंपनियों के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती रही है। आम तौर पर जब कच्चा माल महंगा होता है, तो कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है और इसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है। लेकिन जून तिमाही के नतीजों ने एक अलग तस्वीर दिखाई है। कई कंपनियों ने न सिर्फ बढ़ती लागत का असर संभाला, बल्कि कुछ ने रिकॉर्ड कमाई भी की। सवाल यह है कि आखिर उन्होंने ऐसा किया कैसे? नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां अब सिर्फ कीमतें बढ़ाने पर निर्भर नहीं हैं। वे लागत घटाने, सही समय पर खरीदे गए कच्चे माल का फायदा उठाने, ज्यादा मुनाफा देने वाले कारोबार पर फोकस करने और उत्पादन की बेहतर योजना बनाने जैसी रणनीतियां अपना रही हैं।

हिंदुस्तान जिंक: कम लागत और ऊंची कीमतों का मिला फायदा

(EBITDA 4% बढ़कर 7,994 करोड़ रुपये रहा, जबकि प्रति टन उत्पादन लागत 851 डॉलर पर आ गई)

हिंदुस्तान जिंक के लिए यह तिमाही अच्छी रही। कंपनी को जिंक और चांदी की बेहतर कीमतें मिलीं। वहीं दूसरी ओर उत्पादन लागत भी कम हुई। सल्फ्यूरिक एसिड की अच्छी कीमतों और रुपये की कमजोरी से कंपनी का खर्च घटा। इसका फायदा सीधे मुनाफे में दिखा। हालांकि कंपनी ने पिछले क्वार्टर के मुकाबले कम उत्पादन किया, फिर भी EBITDA बढ़ा। ब्रोकरेज का मानना है कि अगर धातुओं की कीमतें मजबूत बनी रहती हैं और लागत पर नियंत्रण जारी रहता है, तो आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी की कमाई अच्छी रह सकती है। ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 700 रुपये का टारगेट दिया है।

टाटा कंज्यूमर: चाय महंगी हुई तो दूसरे कारोबार ने संभाली कमाई

(आय 12%, EBITDA 19% और भारत के ब्रांडेड कारोबार का वॉल्यूम 13% बढ़ा)

टाटा कंज्यूमर के सामने सबसे बड़ी चुनौती चाय की बढ़ती लागत थी। लेकिन कंपनी ने सिर्फ चाय के कारोबार पर भरोसा नहीं किया। उसने उन कारोबारों पर ज्यादा ध्यान दिया, जहां कमाई बेहतर होती है। रेडी-टू-ड्रिंक ड्रिंक्स, संपन्न ब्रांड, कॉफी, कैपिटल फूड्स और ऑर्गेनिक इंडिया जैसे कारोबार तेजी से बढ़े। इन कारोबारों से हुई अतिरिक्त कमाई ने चाय की महंगी खरीद का असर काफी हद तक कम कर दिया। यानी कंपनी ने अपने कारोबार का संतुलन बदलकर मुनाफा बचाया।

नुवामा को कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ पर भरोसा है। ब्रोकरेज ने अपने अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है और शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,435 रुपये का टारगेट दिया है।

अपार इंडस्ट्रीज: पहले खरीदा सस्ता माल, अब मिल रहा बड़ा फायदा

(आय 29%, EBITDA 68% और शुद्ध मुनाफा 78% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा)

अपार इंडस्ट्रीज की रणनीति सबसे अलग रही। कंपनी ने पहले कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा माल इस्तेमाल किया। जब बाजार में उसी कच्चे माल की कीमतें बढ़ गईं, तब कंपनी को ज्यादा मार्जिन मिलने लगा। यही वजह रही कि ट्रांसफॉर्मर ऑयल और स्पेशियलिटी ऑयल कारोबार में शानदार मुनाफा दर्ज हुआ। हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से यूएई के हमरिया पोर्ट पर रुकावट आई और कुछ वॉल्यूम प्रभावित हुआ, लेकिन पहले से खरीदे गए सस्ते कच्चे माल ने इस नुकसान की भरपाई कर दी। इसी वजह से कंपनी ने अपनी अब तक की सबसे मजबूत तिमाही दर्ज की। हालांकि शेयर में हाल की तेजी को देखते हुए ब्रोकरेज ने ‘HOLD’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर 15,800 रुपये कर दिया है।

कोरोमंडल इंटरनेशनल: जरूरत जितना ही उत्पादन किया

(ऊंची कच्चे माल की लागत के बावजूद कंपनी के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे और फसल सुरक्षा कारोबार ने मुनाफे को सहारा दिया)

उर्वरक कंपनी कोरोमंडल इंटरनेशनल पर फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया और सल्फर जैसी कच्ची सामग्री की ऊंची कीमतों का दबाव रहा। लेकिन कंपनी ने एक अलग रास्ता चुना। उसने ज्यादा उत्पादन करने के बजाय उत्पादन घटा दिया, ताकि महंगा कच्चा माल स्टॉक में फंसकर नुकसान न पहुंचाए। साथ ही फसल सुरक्षा और रिटेल कारोबार से अच्छी कमाई होती रही। कंपनी का मानना है कि अगर सरकार सब्सिडी बढ़ाती है और कच्चे माल की कीमतें सामान्य होती हैं, तो मुनाफे में और सुधार देखने को मिल सकता है।

ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखी है और 2,951 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

जिंदल स्टील: ऊंची कीमतों ने बचाया, लेकिन आगे चुनौती बाकी

(EBITDA 1% बढ़कर 2,670 करोड़ रुपये और प्रति टन EBITDA 11,960 रुपये रहा)

जिंदल स्टील को इस तिमाही में स्टील के अच्छे दाम मिलने का फायदा हुआ। इससे महंगे कोकिंग कोल और दूसरे कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो गई। लेकिन तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। ब्रोकरेज का कहना है कि दूसरी तिमाही में स्टील की कीमतें कुछ नरम पड़ सकती हैं, जबकि कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रह सकती है। अगर ऐसा हुआ तो कंपनी के मार्जिन पर फिर दबाव आ सकता है। यानी इस बार कीमतों ने राहत दी, लेकिन आगे की राह अभी भी आसान नहीं दिख रही।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि मानसून के बाद अगर स्टील की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो कंपनी की कमाई पर और दबाव आ सकता है। इसी वजह से उसने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के EBITDA अनुमान में करीब 2% की कटौती की है। साथ ही शेयर पर ‘REDUCE’ रेटिंग बरकरार रखते हुए लक्ष्य मूल्य 1,018 रुपये से घटाकर 992 रुपये कर दिया है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : July 27, 2026 | 11:15 AM IST