प्रतीकात्मक तस्वीर
बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को प्रस्ताव दिया कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों को भारत में मौजूद रहे बिना डिजिटल केवाईसी पूरी करने की अनुमति दी जाए। लेकिन शर्त यह है कि वे फाइनैंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ)के नियमों का पालन करने वाले देश में हों। इन लोगों में प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई, भारत के विदेश में रह रहे नागरिक (ओसीआई)और विदेशी नागरिक शामिल हैं।
प्रस्ताव यह है कि पीआरओआई यानी भारत से बाहर निवास कर रहे लोगों के लिए ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को आसान बनाया जाए और प्रतिभूति बाजार में आसानी से डिजिटल ऑनबोर्डिंग की सुविधा दी जाए। प्रस्तावित बदलावों के तहत इंटरमीडियरीज एफएटीएफ अनुपालन वाले देशों में मौजूद व्यक्तिगत पीआरओआई क्लाइंटों से केवाईसी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों को डिजिटल रूप से स्वीकार करेंगी। डिजिटल ऑनबोर्डिंग के दौरान निवेशक के भारत में मौजूद होने की शर्त में ढील दी जाएगी।
हालांकि, नियामक ने इंटरमीडियरीज के लिए सुरक्षा उपाय भी बताए हैं, जैसे कि उस व्यक्ति के बारे में यह पक्का करना कि व्यक्ति असल में मौजूद है, अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में केवाईसी करना, क्लाइंट की भौगोलिक स्थिति के मुताबिक पते के सबूत में बताए गए देश से मिलान और स्पूफ किए गए आईपी एड्रेस से कनेक्शन को रोकना शामिल है।
सेबी के परामर्श पत्र में कहा गया है, यह ध्यान दिया जाए कि केवाईसी पर आरबीआई के मौजूदा मास्टर निर्देशों के अनुसार ऑनबोर्डिंग के समय क्लाइंट का भारत में मौजूद होना जरूरी होता है। इसलिए, प्रतिभूति बाजार इंटरमीडियरी के साथ डिजिटल केवाईसी के दौरान पीआरओआई क्लाइंट के लिए भारत में मौजूद रहने की शर्त में दी गई यह छूट उन पीआरओआई क्लाइंटों के लिए फायदेमंद होगी, जिनका पहले से ही बैंक खाता है।
यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय द्वारा जून में विदेशी मुद्रा प्रबंधन (नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट्स) नियम, 2019 में किए गए उस संशोधन के बाद आया है, जो विदेशी नागरिकों को देश में एफपीआई रूट का इस्तेमाल किए बिना भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश करने की इजाजत देता है। इसका मकसद विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। नियामक ने कहा कि पीआरओआई भारतीय प्रतिभूति बाजार में अहम भूमिका निभाते हैं और भारत में निवेश के बढ़ते दायरे का प्रतिनिधित्व करते हैं।
परामर्श पत्र में कहा गया है, आसानी से ऑन-बोर्डिंग की सुविधा से बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और भारतीय मूल के लोगों (एनआरआई और ओसीआई) के लिए अपने देश में निवेश करना आसान हो जाएगा और विदेशों में जमा बचत को भारतीय पूंजी बाजार में लगाया जा सकेगा।
इस प्रस्ताव में व्यक्तिगत पीआरओआई के केवाईसी रिकॉर्ड को पोर्टेबल बनाने की भी बात कही गई है। केवाईसी पंजीकरण एजेंसियां (केआरए) ऐसे सभी रिकॉर्ड को पोर्टेबल मानेंगी और जिन व्यक्तिगत जानकारियों को किसी आधिकारिक या सोर्स डेटाबेस से सत्यापित किया गया है, उन्हें सत्यापित के तौर पर बताया जाएगा।
अगर पीआरओआई क्लाइंटों की ओर से जमा किए गए आधिकारिक तौर पर मान्य दस्तावेज को किसी सरकारी या सोर्स डेटाबेस से सत्यापित किया जा सकता है तो उन्हें अपने मौजूदा पते का सेल्फ-डिक्लेरेशन देने की भी इजाज़त होगी। सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि इंटरमीडियरीज़, केवाईसी सिस्टम से मिले रिकॉर्डों के आधार पर किसी दूसरी सेबी पंजीकृत इंटरमीडियरी या वित्तीय क्षेत्र के दूसरे नियामक के तहत आने वाली संस्था द्वारा किए गए केवाईसी पर भरोसा कर सकती हैं।
परामर्श पत्र में कहा गया है कि डिजिटल ऑनबोर्डिंग के लिए क्लाइंट का भारत में मौजूद होना जरूरी है, जिसकी वजह से भारत के बाहर रहने वाले पीआरओआई इस प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से पूरा नहीं कर पाते हैं। इसमें कहा गया है कि यह समीक्षा हितधारकों की उन मांगों के बाद की गई है, जिनमें सशरीर मौजूदगी, मूल दस्तावेजों का सत्यापन, हस्ताक्षर और केवाईसी रिकॉर्ड की पोर्टेबिलिटी से जुड़ी जरूरतों में ढील देने की मांग की गई थी।