प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पिछले छह वर्षों में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में रोजाना का औसत टर्नओवर तेजी से बढ़ा है। इस मामले में जिंस ईटीएफ के टर्नओवर में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है। कुल ईटीएफ टर्नओवर वित्त वर्ष 2020-21 के 237 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 4,577 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और फिर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में थोड़ा कम होकर 4,390 करोड़ रुपये पर आ गया।
कमोडिटी ईटीएफ के टर्नओवर में मुख्य रूप से गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ शामिल हैं। वित्त वर्ष 26 के दौरान इनमें जबरदस्त उछाल देखा गया है। यह वित्त वर्ष 25 के 224 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 2,907 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह कुल टर्नओवर का लगभग 60 फीसदी है। डेट ईटीएफ की गतिविधियों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है और यह वित्त वर्ष 21 के 107 करोड़ रुपये से बढ़कर हाल की तिमाही में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
जून 2026 तक भारत के पैसिव फंड उद्योग की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) बढ़कर 14.82 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं। मई में सुस्त रहने के बाद 16,622 करोड़ रुपये के मजबूत शुद्ध निवेश से इसे सहारा मिला। पहली तिमाही में पैसिव योजनाओं में शुद्ध निवेश 34,641 करोड़ रुपये रहा।
जीरोधा फंड हाउस की पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 26 में गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश 68,868 करोड़ रुपये हुआ था, जो कुल निवेश का 38 फीसदी हिस्सा है। सिल्वर ईटीएफ में यह निवेश 30,412 करोड़ रुपये रहा जो कुल निवेश का 16.8 फीसदी है। किसी फंड मैनेजर के ऐक्टिव रूप से शेयर चुनने के बजाय एक पैसिव फंड अपने-आप उन्हीं प्रतिभूतियों में उसी अनुपात में निवेश करता है, जो किसी इंडेक्स में होता है।