त्योहारी सीजन में चीनी की सप्लाई कमजोर न पड़े, इसके लिए सरकार ने इस साल गन्ने का पेराई सीजन 15 अक्टूबर से शुरू करने की मंजूरी दी है। चीनी मिलें पेराई सीजन शुरू करने की तैयारी में लगी हैं। पेराई सीजन शुरू करने से पहले चीनी मिलों को गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करना होगा। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर महाराष्ट्र चीनी आयुक्तालय ने 15 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है।
15 चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस नहीं देने की चेतावनी
15 सितंबर को हुई समीक्षा में सामने आया कि राज्य की 30 चीनी मिलों पर 2025-26 के गन्ना पेराई सत्र का कुल करीब 194 करोड़ रुपये का एफआरपी बकाया है। चीनी आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि बकाया उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) का भुगतान नहीं करने वाली मिलों को आगामी पेराई सत्र के लिए क्रशिंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। डिफॉल्टर मिलों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) भी जारी किए जाएंगे।
30 चीनी मिलों पर बकाया है भुगतान
राज्य की करीब 180 चीनी मिलों ने अपनी पूरी एफआरपी देनदारी चुका दी है, जबकि 30 मिलों में अभी भी भुगतान की कमी बनी हुई है। इन मिलों पर बकाया राशि कुछ मामलों में अपेक्षाकृत कम है, जबकि कुछ मिलों पर लगभग पूरी एफआरपी देनदारी अभी तक लंबित है। संबंधित चीनी मिलें मराठवाड़ा और सोलापुर जिलों की हैं। अधिकारी इन मिलों की वित्तीय स्थिति और बकाया चुकाने की क्षमता का आकलन कर रहे हैं। एफआरपी का भुगतान कानून के तहत अनिवार्य है और बकाया नहीं चुकाने वाली मिलों को अगले पेराई सत्र का लाइसेंस नहीं मिलेगा।
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दो सप्ताह के अंदर करना होगा एफआरपी का भुगतान
गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत चीनी मिलों को किसानों से गन्ना प्राप्त होने के 14 दिनों के भीतर निर्धारित FRP का भुगतान करना अनिवार्य है। भुगतान में चूक होने पर चीनी आयुक्त RRC के माध्यम से वसूली की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। इसके तहत जिला प्रशासन चीनी मिलों के स्टॉक को अटैच करने, संपत्तियों को जब्त करने या फैक्ट्री के गोदामों में रखी चीनी की नीलामी के जरिए किसानों की बकाया राशि की वसूली कर सकता है।
अभी भी गन्ना किसानों के 194 करोड़ रुपये बकाया
अप्रैल में 2025-26 के क्रशिंग सीजन के अंत तक चीनी मिलों पर लगभग 1,303 करोड़ रुपये का FRP बकाया था। बाद में यह बकाया राशि तेजी से घटकर 194 करोड़ रुपये रह गई। हालांकि, 30 मिलों पर अभी भी किसानों का भुगतान लंबित है। इस बीच, राज्य सरकार ने चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन के जरिए बकाया FRP चुकाने और कार्यशील पूंजी मजबूत करने के लिए करीब 738 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता मंजूर की है। इस राशि का इस्तेमाल नए पेराई सत्र से पहले गन्ने की कटाई और परिवहन खर्च में सहायता के लिए भी किया जाना है। राज्य में नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला है।
पिछले सत्र में 210 मिलों को मिला था लाइसेंस
पिछले पेराई सत्र में महाराष्ट्र में कुल 210 चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस दिया गया था। इनमें 105 सहकारी और 105 निजी चीनी मिलें शामिल थीं। इन मिलों ने सामूहिक रूप से करीब 1,045 लाख टन गन्ने की पेराई की थी। पिछले सत्र के लिए कुल FRP देनदारी करीब 30,278 करोड़ रुपये थी। इसमें गन्ने की कटाई और परिवहन का खर्च शामिल नहीं था। मिलों ने किसानों को कुल करीब 31,562 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो निर्धारित FRP देनदारी से अधिक था। दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कई फैक्ट्रियों ने किसानों को तय FRP से ज्यादा भुगतान किया था।
