‘फार्मा, सरकार, शिक्षाविदों में रहा बेहतर सहयोग’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 10:35 PM IST

बीएस बातचीत
भारतीय फार्मा क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है। इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने सोहिनी दास से उन रुझानों के संबंध में बात की, जो वर्ष 2021 में खास रहे तथा आगे चलकर भारतीय दवा उद्योग में क्या होने वाला है। संपादित अंश :
वर्ष 2021 में भारतीय फार्मा उद्योग पर हावी होने वाले प्रमुख रुझान क्या रहे?
हर आपदा अवसर प्रदान करती है। कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य सेवा को केंद्रीय मंच पर ले आई। वर्ष 2021 में एक बड़ा रुझान रहा सहयोग – सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच। नौकरशाह सबसे अधिक समाधान उन्मुखी रहे (और इस बात पर ध्यान केंद्रित किया) कि क्या किया जा सकता है तथा तेजी से किया जा सकता है। दूसरी बात यह कि हमने आत्मनिर्भरता का महत्त्व अनुभव किया। कोविड के शुरुआती दिनों में हमारे पास पर्याप्त पीपीई किट, टेस्टिंग किट, वेंटिलेटर आदि नहीं थे। हमें अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा खुद निर्मित करनी पड़ी है। हमने यह भी देखा कि नियामक प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित हो गईं। अनुसंधान एवं विकास पर अधिक जोर एक अन्य ऐसा प्रमुख क्षेत्र रहा, जो वर्ष 2021 में उभरा। भारतीय दवा उद्योग ने रोजगार और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया। डिजिटलीकरण और जिस रफ्तार से यह हुआ, वह एक बड़ा बदलाव था। हम किसी भी यूएसएफडीए (यूनाइटेड स्टेट्स फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और दुनिया भर के हितधारकों के साथ जुड़ सकते हैं। टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में जागरूकता दिन दुगनी और रात चौगुनी हुई है। कल्पना कीजिए कि एक पल्स ऑक्सीमीटर घरों में पहुंच चुका है और लोग अब सतर्कतापूर्वक अपने स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं।

महामारी ने फार्मा उद्योग के काम करने के तरीके को किस तरह बदल दिया है?
नजरिये में एक खास बदलाव आया है, अब यह ज्यादा सहयोगात्मक है। पहले के वक्त में यह होता था कि अगर बिक्री टीम ने उत्पादन टीम को कोई पूर्वानुमान दिया है और वह गलत हो गया, तो उत्पादन टीम निश्चित रूप से वापस आएगी और पूछेगी कि गलत पूर्वानुमान क्यों दिया गया था। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि चीजें काफी अलग हैं, अधिक सहयोगी हैं, व्यापक अनिश्चितताओं आदि की अधिक समझ है।
स्वैच्छिक लाइसेंसिंग का चलन बढ़ा है, रेमडेसिविर इसका एक उदाहरण है। भविष्य में हमें इसका और फायदा उठाना चाहिए। डिजिटलीकरण ने गुणवत्ता नियंत्रण और आश्वासन, आपूर्ति शृंखला परिचालन, क्लीनिकल​​परीक्षणों को आसान बनाने में मदद की।

नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाने के लिए आपने सरकार से किस तरह की सिफारिशें की हैं?
हमने नियामक पक्ष के संबंध में चीजों को सुव्यवस्थित करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कहा है। उदाहरण के लिए, हमने सुझाव दिया है कि प्रत्येक प्रस्ताव (उद्योग की ओर से दवा की मंजूरी या क्लीनिकल​​परीक्षण के लिए) को किसी परियोजना की तरह माना जाना चाहिए। अमेरिका में परिचालन की स्पष्ट मानक प्रक्रियाएं (एसओपी) हैं। हमें भारत में भी ऐसे एसओपी बनाने की जरूरत है।

ऐसा कब तक होगा कि थोक दवाओं के लिए हम चीन पर निर्भर न रहें?
विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखला खासी जरूरी है। 1980 के दशक में भारत ने वह लाभ गंवा दिया था। हमें इसे पुनर्जीवित करना होगा, लेकिन यह एक साल में नहीं होने वाला। चीन वह लाभ पहले ही विकसित कर चुका है और उनकी उत्पादन लागत पहले ही 25 से 30 फीसदी तक कम है। इस सरकार ने नीतिगत स्तर पर कदम उठाए हैं। हमें एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट के लिए धीरे-धीरे विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखला का निर्माण करना होगा।

भारतीय फार्मा द्वारा कोविड-19 की दवाओं के लिए कोई बुनियादी आरऐंडडी (अनुसंधान एवं विकास)?
वर्तमान में केवल टीके ही हैं, जहां हमने कुछ मौलिक अनुसंधान किए हैं – एमआरएनए, डीएनए। भारतीय फार्मा द्वारा अभी तक कोविड-19 की दवाओं के लिए बुनियादी अनुसंधान के संबंध में सार्वजनिक क्षेत्र में कुछ नहीं है। वैश्विक प्रमुख कंपनियों के साथ सहयोग की बातचीत चल रही है।

वर्ष 2022 और उससे आगे का परिदृश्य क्या है?
ध्यान दिए जाने वाले कुछ क्षेत्र हैं। हम जानते हैं कि दवाओं के मामले मेंं विश्व बाजार का 67 प्रतिशत हिस्सा पेटेंट उत्पादों से आता है। उस क्षेत्र में भारत की मौजूदगी काफी कम है। हमें दवा की खोज पर ध्यान देना होगा जाइडस कैडिला, सन फार्मा, ल्यूपिन और सिप्ला जैसी कुछ कंपनियां अपना अनुसंधान व्यय बढ़ा रही हैं। हमें न केवल मात्रा के लिहाज से शीर्ष पर होना है, बल्कि मूल्य के लिहाज से भी शीर्ष पांच में शामिल होना है। वर्तमान में मूल्य के लिहाज से हम 13वें स्थान पर हैं।

चूंकि आयुष और अधिक मुख्यधारा में आ रहा है, तो क्या एलोपैथिक उद्योग को यहां कोई अवसर दिखाई दे रहा है?
भारत की परंपरागत स्वास्थ्य प्रणाली में मौका है। पुरानी बीमारियों के मामले में आयुष बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

First Published : December 27, 2021 | 11:18 PM IST