Monsoon 2026: देश के कई हिस्सों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल मानसून की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले करीब दो हफ्तों तक मध्य और उत्तर भारत के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि यही समय खरीफ फसलों की बुवाई का होता है।
दरअसल, पश्चिमी विक्षोभों की वजह से मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार पर असर पड़ा है। इसका मतलब यह है कि जिन इलाकों में अब तक अच्छी बारिश पहुंच जानी चाहिए थी, वहां बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई है। इसका असर धान, कपास, सोयाबीन और दालों जैसी फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है।
इस समय किसान खेतों में बुवाई की तैयारी करते हैं और उन्हें अच्छी बारिश का इंतजार रहता है। अगर बारिश देर से आती है या कम होती है, तो बुवाई का काम भी पीछे खिसक सकता है। कई जगहों पर खेतों में अभी उतनी नमी नहीं बन पाई है, जितनी इस समय होनी चाहिए। भारत में बड़ी संख्या में किसान आज भी बारिश पर ही निर्भर हैं। ऐसे में मानसून की चाल धीमी पड़ना खेती-किसानी के लिए चिंता की बात माना जाता है।
हालांकि हर जगह स्थिति खराब नहीं है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश जारी रहने की उम्मीद है। इन राज्यों में किसानों को फिलहाल ज्यादा परेशानी नहीं दिख रही है और जलाशयों में भी पानी आने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून इन राज्यों में अच्छी तरह आगे बढ़ चुका है और अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला बना रह सकता है।
इस बार मानसून ने केरल में भी थोड़ी देरी से दस्तक दी थी। इसके बाद से उसकी रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। आंकड़े बताते हैं कि जून के पहले 10 दिनों में देशभर में सामान्य से 26.5 फीसदी कम बारिश हुई है। यानी महीने की शुरुआत बारिश के लिहाज से कमजोर रही है और कई राज्यों में लोग अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि यह सुस्ती ज्यादा दिन नहीं रहेगी। विभाग का कहना है कि जून के आखिरी हफ्ते में मानसून फिर से जोर पकड़ सकता है। अगर मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो बारिश बढ़ेगी और मानसून तेजी से देश के बाकी हिस्सों में भी फैल सकता है। फिलहाल किसानों और कृषि बाजार की नजरें अगले दो हफ्तों पर टिकी हैं। अगर महीने के आखिर में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की रफ्तार भी बढ़ सकती है और खेती से जुड़ी चिंताएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।