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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर पूर्व जापानी मंत्री के बिगड़े बोल, भारत का करारा जवाब: तथ्यों से कोसों दूर हैं आरोप

भारत ने बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी को लेकर पूर्व जापानी मंत्री की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि पहला सेक्शन 2027 में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से शुरू होगा

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- July 17, 2026 | 10:41 PM IST

भारत ने एक पूर्व जापानी मंत्री द्वारा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी की आलोचना किए जाने को ‘व्यक्तिगत राय और तथ्यों से काफी दूर’ बताया। जापान इस परियोजना को वित्तीय और तकनीकी सहायता मुहैया करा रहा है।

भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषताओं के अनुरूप सिग्नलिंग उपकरणों के ऑर्डर को लेकर जापान की ओर से कोई पेशकश नहीं मिली है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चूंकि जापान 2030 के आरंभ तक ही ई10 ट्रेन श्रृंखला मुहैया कराएगा इसलिए दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि संचालन की शुरुआत एक भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से की जाएगी और पहला सेक्शन 2027 में ही खुल जाएगा।

इस सप्ताह की शुरुआत में जापान के पूर्व राज्य मंत्री (अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग) हिदेकी माकिहारा ने एक जापानी मीडिया लेख पर अपनी प्रतिक्रिया पोस्ट की। यह लेख मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर था जिसे जापान वित्तपोषित कर रहा है और तकनीक भी प्रदान कर रहा है। लेख में दावा किया गया कि जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा से कोई नतीजा नहीं निकला और हालात को ‘इंडिया शिंकान्सेन फेल्योर’ तथा ‘सिग्नल सिस्टम से जापान बाहर’ के रूप में वर्णित किया गया।

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में माकिहारा ने भारतीय पक्ष के दृष्टिकोण पर आरोप लगाया कि यह पूरी तरह अराजकता है, वादों को निभाया नहीं जा रहा है और लगातार ‘अपने स्वार्थ को आगे बढ़ाया जा रहा है।’

आज शाम विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में माकिहारा की सोशल मीडिया पोस्ट पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पूर्व जापानी मंत्री के विचारों को ‘तथ्यों से काफी दूर’ बताया। प्रवक्ता ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन पर भारत और जापान के बीच चर्चाएं वास्तव में अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं। जायसवाल ने कहा कि जापान ई10 शृंखला की ट्रेनें उपलब्ध कराएगा लेकिन केवल शुरुआती 2030 के दशक में और जिस ट्रेन का उल्लेख लेख और माकिहारा की पोस्ट में किया गया है वह अभी विकासाधीन है।

उन्होंने कहा, ‘इस बीच निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ा है। पहला सेक्शन 2027 में ही खोला जाएगा। इसलिए दोनों पक्षों ने भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से संचालन शुरू करने पर सहमति जताई।’

प्रवक्ता ने कहा, ‘सिग्नलिंग उपकरण उसी अनुसार ऑर्डर किए गए हैं और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। इस संदर्भ में कोई जापानी प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा कि परियोजना का क्रियान्वयन इस साझा लक्ष्य के अनुरूप है कि हाई स्पीड ट्रेन परियोजना को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

इस सप्ताह की शुरुआत में अपने एक्स पोस्ट में जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने कहा, ‘भारत में शिंकान्सेन परियोजना में मैं स्वयं शामिल रहा हूं लेकिन अंतरराष्ट्रीय बैठकों और वार्ताओं में जो सबसे अधिक सामने आया वह भारतीय पक्ष की पूर्ण अराजकता थी जिसे बार-बार दोहराया गया।’ पूर्व मंत्री ने भारतीय पक्ष पर वादे निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘वे किसी भी हालत में वादे निभाते ही नहीं। अगर वादा करते भी हैं तो तुरंत पलट जाते हैं। वे अंत तक अपने स्वार्थ को ही आगे बढ़ाते रहते हैं।’ माकिहारा ने यह भी जोड़ा कि ‘जिम्मेदार मंत्री विशेष रूप से बेहद खराब थे,’ और ‘अगर शीर्ष स्तर पर ऐसा व्यक्ति है तो किसी भी तरह का उचित व्यवहार संभव नहीं।’

माकिहारा जापान के पूर्व न्याय मंत्री भी हैं जो 2024 में अपनी सीट हारने के बाद से सांसद नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जापानी लोगों ने इसमें अपना दिल लगाया है और उनके सम्मान के लिए मुझे यह कहना ही होगा। मुझे सौ प्रतिशत लगता है कि यह आगे नहीं बढ़ा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है।’

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (508 किलोमीटर) में देरी का कारण भूमि अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया रही है। भारत और जापान ने 2015 में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और परियोजना सात वर्षों में लगभग 10.1 अरब डॉलर की अनुमानित लागत पर पूरी होनी थी। जापान ने 81 फीसदी वित्तपोषण देने और अपनी शिंकान्सेन तकनीक का उपयोग करने पर सहमति जताई थी।

नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की वेबसाइट के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत 17 अरब डॉलर है और इसे जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) से आधिकारिक विकास सहायता ऋण के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके मुताबिक कुल परियोजना लागत का लगभग 81फीसदी जापान सरकार द्वारा जाइका के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा। शेष लागत भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी। वेबसाइट पर यह भी बताया गया है कि परियोजना के लिए 100 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। कॉरिडोर के लिए निर्धारित 1390 हेक्टेयर भूमि में से 430 हेक्टेयर महाराष्ट्र में और 960 हेक्टेयर गुजरात तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में है।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1–3 जुलाई के दरमियान वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आई थीं। यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों प्रधानमंत्रियों, ताकाइची और नरेंद्र मोदी ने ‘मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल के दोनों देशों की एक महत्वपूर्ण परियोजना होने की बात को दोहराया।’

बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि जापान भारत के 2027 में प्राथमिक सेक्शनों पर वाणिज्यिक संचालन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझता है और आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘ई10 ट्रेन को शुरू करने के लक्ष्य को स्वीकार किया।’ उन्होंने यह भी इच्छा व्यक्त की कि भविष्य के हाई स्पीड कॉरिडोरों पर सहयोग के संभावित तरीकों की खोज की जाए ताकि भारत के 7,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विजन को पूरा किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को भविष्य के कॉरिडोरों के विकास में भागीदारी के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया और इस तरह की भागीदारी को सुगम बनाने की अपनी तत्परता व्यक्त की जिसका जापानी पक्ष ने स्वागत किया। बयान में कहा गया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाले सहयोग और हाई स्पीड रेल तथा व्यापक गतिशीलता में निवेश को तेज करने पर सहमति जताई जिसका उद्देश्य जापान की उन्नत गतिशीलता वाली तकनीकों को भारत के उत्कृष्ट मानव संसाधन और बाजार क्षमता के साथ जोड़ना है।

First Published : July 17, 2026 | 10:41 PM IST