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6 साल बाद सरकार ने क्यों बदला UPI का नियम? क्या ₹20,000 करोड़ का खर्च है वजह, जानें 15 अक्टूबर से क्या बदलेगा

UPI Payment Charges:  UPI से पेमेंट का सिस्टम 15 अक्टूबर से बदलने जा रही है। किसी कारोबारी को 2,000 रुपये से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगेगा। यह फीस ग्राहक से नहीं,…

UPI Payments

UPI Payments

Last Updated: सितंबर 16, 2026 | 6:49 PM IST

UPI Payment Charges:  UPI से पेमेंट का सिस्टम 15 अक्टूबर से बदलने जा रही है। किसी कारोबारी को 2,000 रुपये से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगेगा। यह फीस ग्राहक से नहीं, बल्कि पेमेंट लेने वाले व्यापारी से वसूला जाएगा।

नए नियम के तहत एक ट्रांजेक्शन पर अधिकतम फीस 300 रुपये रखा गया है। हालांकि, पर्सन टू पर्सन ट्रांजेक्शन, छोटे दुकानदारों को पेमेंट करने और रोजमर्रा के ज्यादातर UPI ट्रांजेक्शन पर कोई फीस नहीं लगेगा।

बता दें कि UPI पेमेंट से जुड़ा यह बदलाव जनवरी 2020 से लागू जीरो MDR वाले सिस्टम को बदलता है। अब सवाल है कि 6 साल तक UPI पेमेंट फ्री रखने के बाद सरकार को नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या UPI नेटवर्क को चलाने में होने वाला करीब 20,000 करोड़ रुपये का सालाना खर्च इसकी वजह है?

6 साल तक कैसे मुफ्त रहा UPI?

जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और रुपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट पर MDR खत्म कर दिया था। इसका मकसद लोगों और दुकानदारों को डिजिटल पेमेंट अपनाने को बढ़ावा देना था। इसके तहत UPI यूज करने वाले ग्राहक और पेमेंट लेने वाले व्यापारी से कोई फीस नहीं लिया जाता था।

अब 6 साल बाद UPI नेटवर्क काफी बढ़ गयी है, जिसे चलाने में भारी खर्च भी होता है। इसके लिए बैंक और पेमेंट कंपनियां सर्वर, बैंडविड्थ, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने, कस्टमर हेल्प और टेक्निकल सिस्टम पर पैसा खर्च होता है। अब तक सरकार इसकी कुछ भरपाई बजट से सालाना प्रोत्साहन देकर करती थी।

कितना बड़ा हो गया UPI का नेटवर्क?

अगस्त 2026 में UPI से 2,451 करोड़ लेनदेन किए गए, जिनकी कुल कीमत 29.9 लाख करोड़ रुपये थी। FY26 में UPI से कुल 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कीमत करीब 314 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि UPI शुरू होने वाले FY17 में केवल 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे और उनका मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान UPI से जुड़े बैंकों की संख्या भी 44 से बढ़कर 703 हो गई। देश में करीब 55 करोड़ लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या ₹20,000 करोड़ का खर्च है नियम बदलने की वजह?

NPCI ने इंडस्ट्री के अनुमानों का हवाला देते हुए बताया है कि UPI नेटवर्क चलाने में सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसमें सर्वर, इंटरनेट क्षमता, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और बैंकों की तकनीकी सहायता जैसे खर्च शामिल हैं।

वित्तीय सेवा विभाग ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को बताया था कि केवल पर्सन टू मर्चेंट को किए जाने वाले UPI पेमेंट पर पेमेंट इंडस्ट्री हर साल करीब 20,700 करोड़ रुपये खर्च करता है। मार्च में संसदीय समिति ने भी कहा था कि MDR नहीं होने के कारण UPI  सिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से चलाना मुश्किल हो सकता है।

Also Read: ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर फीस क्यों? समझें 6 साल बाद क्यों बदला नियम

सरकार से कितनी आर्थिक मदद मिलती है?

UPI और रुपे डेबिट कार्ड से बिना फीस पेमेंट की फैसिलिटी देने के बदले सरकार बैंक और पेमेंट कंपनियों को बजट से प्रोत्साहन देती है। इस मद में सरकार का सबसे ज्यादा खर्च FY24 में 3,631 करोड़ रुपये रहा। FY26 के बजट में शुरुआत में केवल 437 करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया था। हालांकि, बाद में पेमेंट बढ़ाकर करीब 2,196 करोड़ रुपये कर दिया गया।

FY27 में सरकार ने कम रकम वाले BHIM-UPI और रुपे डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहन देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये रखे हैं। यह रकम UPI को चलाने की करीब 20,000 करोड़ रुपये की अनुमानित सालाना लागत से काफी कम है। सबसे ज्यादा सहायता वाले साल में भी सरकारी रकम अनुमानित खर्च के करीब दसवें हिस्से तक ही पहुंची।

सरकारी सहायता पर निर्भरता क्यों बनी समस्या?

NPCI ने सरकारी प्रोत्साहन को स्थायी समाधान के बजाय छोटी अवधि की मदद बताया है। उसके मुताबिक केवल सालाना बजट पर निर्भर रहने से बैंक और फिनटेक कंपनियों के सामने रकम की अनिश्चितता बनी रहती है।

इससे वे UPI की क्षमता बढ़ाने, तकनीक सुधारने और साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए लंबी अवधि का निवेश करने में परेशानी महसूस कर सकते हैं। पेमेंट इंडस्ट्री कई सालों से मांग कर रहा था कि पूरी तरह सरकारी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय बड़े मर्चेंट्स से नियंत्रित दर पर MDR लेने की अनुमति दी जाए।

15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

किसी मर्चेंट को UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा।

उदाहरण के तौर पर:

  • 5,000 रुपये के पेमेंट पर 20 रुपये MDR बनेगा।
  • 50,000 रुपये के पेमेंट पर 200 रुपये MDR होगा।
  • 75,000 रुपये के पेमेंट पर 300 रुपये फीस लगेगा।
  • इससे ज्यादा रकम पर भी अधिकतम फीस 300 रुपये ही रहेगा।

बताते चलें कि यह पैसा पेमेंट करने वाले ग्राहक के खाते से अलग से नहीं कटेगा। इसे UPI से रकम लेने वाला मर्चेंट चुकाएगा।

किन सर्विसेस पर कम फीस लगेगा?

रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सर्विसेस के लिए अलग सिस्मट बनाई गई है। इन सर्विसेज के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर केवल 5 रुपये का एकसमान फीस लगेगा।

म्यूचुअल फंड, शेयर खरीदने और ब्रोकर से जुड़े UPI पेमेंट पर MDR की दर 0.02 फीसदी होगी। इस कैटेगरी में भी एक ट्रांजेक्शन पर अधिकतम फीस 300 रुपये रखा गया है।

क्या छोटे दुकानदारों पर भी पड़ेगा बोझ?

UPI QR कोड के जरिए एक महीने में 1 लाख रुपये तक का पेमेंट लेने वाले छोटे दुकानदारों को नए फीस से छूट दी गई है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में मर्चेंट्स के QR कोड पर किए जाने वाले पेमेंट भी फ्री रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन छूटों के कारण करीब 96 फीसदी कारोबारी UPI ट्रांजेक्शन पर नया फीस नहीं लगेगा।

क्या ग्राहक को देना होगा शुल्क?

NPCI के मुताबिक MDR को ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। UPI ऐप चलाने वाली कंपनियां भी ग्राहकों से प्लेटफॉर्म फीस या कोई छिपा हुआ फीस नहीं ले सकती हैं। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट MDR की रकम सीधे ग्राहक से न वसूलें।

केवल 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर फीस क्यों?

सरकार रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट को फ्री रखना चाहती है। इसलिए MDR को केवल बड़ी रकम वाले कारोबारी पेमेंट तक सीमित रखा गया है।FY26 में मर्चेंट्स को किए गए कुल UPI ट्रांजेक्शन की संख्या में केवल करीब 4 फीसदी पेमेंट 2,000 रुपये से ज्यादा के थे। हालांकि, कारोबारी UPI पेमेंट की कुल रकम में इनकी हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई थी। इसका मतलब है कि संख्या के लिहाज से बहुत कम पेमेंट फीस के दायरे में आएंगे, लेकिन रकम के लिहाज से इनकी हिस्सेदारी काफी बड़ी है।

आंकड़ों के मुताबिक कारोबारियों को किए जाने वाले कुल UPI पेमेंट में करीब 86 फीसदी ट्रांजेक्शन 500 रुपये से कम के थे। चाय, सब्जी, बस किराया और रोजमर्रा की दूसरी छोटी खरीदारी पर नए नियम का असर नहीं पड़ेगा।

पर्सन टू पर्सन पेमेंट पर क्या नियम है?

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI से पैसे भेजने पर कोई फीस नहीं लगेगा। किराया, वेतन, घर भेजे जाने वाले पैसे और दूसरे निजी लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।

बता दें कि पर्सन टू पर्नस पेमेंट कुल UPI ट्रांजेक्शन की संख्या का करीब 37 फीसदी हैं, लेकिन UPI से भेजी गई कुल रकम में इनकी हिस्सेदारी 71 फीसदी है। इन सभी ट्रांजेक्शन को नए MDR से बाहर रखा गया है।

सरकार के फैसले पर जानकारों की राय

रिसर्जेंट इंडिया लिमिटेड के MD ज्योति प्रकाश गाडिया के मुताबिक चुनिंदा कारोबारी ट्रांजेक्शन पर MDR लगाना UPI सिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि नया फीस क्रेडिट कार्ड जैसे ट्रेडिशनल पेमेंट मीडियम के मुकाबले काफी कम है। इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे, साइबर सिक्योरिटी और नई टेक्नोलॉजी के विकास में किया जा सकता है।

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