मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन | फाइल फोटो
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने आज कहा कि भारत को वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की सुरक्षा और संरक्षा के बारे में सक्रिय रहने की जरूरत है क्योंकि कंपनियां इस तकनीक को तेजी से अपना रही हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस क्षेत्र के पास जोखिमों के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देने की सुविधा शायद न हो।
एसोचैम के इंडिया इंटरनैशनल फिनटेक फेस्टिवल को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि एआई फिनटेक उद्योग में काफी सुधार ला सकता है। वह कंपनियों को साख का अधिक सटीकता से आकलन करने और शुरुआती चरण में ही जोखिमों व वित्तीय दबाव की पहचान करने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘विशेष रूप से फिनटेक के संदर्भ में बात की जाए तो एआई निश्चित तौर पर उद्योग की तमाम कंपनियों की मदद करने जा रहा है। यह साख का बेहतर विश्लेषण करेगा, जोखिमों और दबाव को बहुत पहले ही उजागर कर देगा।’ सीईए ने एआई एजेंटों द्वारा स्वायत्त रूप से कार्य करने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए आगाह किया कि उत्पादक क्षमता के साथ-साथ सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
मेटा ने इस सप्ताह घोषणा की थी कि उसके एक एआई मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान एक अन्य कंपनी को हैक कर लिया। इससे पहले ओपनएआई और एंथ्रोपिक पीबीसी ने भी कहा था उनके एआई मॉडल ने परीक्षण के दौरान अनजाने में कई संस्थानों के सिस्टम में सेंध लगा दी थी।
नागेश्वरन ने कहा, ‘हम आम तौर पर तब तक जोखिमों पर ध्यान नहीं देते जब तक वह असल में सामने नहीं आ जाते हैं। मगर हमारा ध्यान उस पर होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र जोखिमों के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देने का इंतजार नहीं कर सकता।