दिल्ली राज्य सहकारी बैंक जैसे संस्थानों में वित्तीय और व्यावसायिक मानकों पर लंबे ठहराव को लेकर एक उच्च स्तरीय समिति ने गंभीर चिंता जताई है। इस तरह की अल्पकालिक सहकारी ऋण संस्थानों की स्थिति में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति ने हाल ही में एक व्यापक नैदानिक अध्ययन को मंजूरी दी है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सहकारी क्षेत्र का यह पहला व्यापक नैदानिक मूल्यांकन होगा। इससे जानकारी में महत्त्वपूर्ण अंतर की भरपाई होगी और पता चल सकेगा कि इस क्षेत्र के दीर्घकालिक सुधार के लिए किस तरह की नीतिगत जरूरतें हैं। इस अध्ययन से सहकारी क्षेत्र के सुधार के लिए साक्ष्यों पर आधारित खाका मिल सकेगा।
समिति ने नैबकॉन से यह अध्ययन करने को कहा है। नैबकॉन, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के पूर्ण स्वामित्तव वाली इकाई है। यह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बैंकिंग और वित्त, सूक्ष्म उद्यम और इस तरह के अन्य क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ परामर्श और सलाहकारी सेवाएं प्रदान करती है।
दिल्ली में अल्पकालिक ऋण पर उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के सहकारिता सचिव पांडुरंग के पोल ने की। समिति ने कहा है कि अगर दिल्ली के सहकारी बैंकों की मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो लंबी अवधि के हिसाब से ये अप्रासंगिक और प्रतिस्पर्धा से बाहर हो सकते हैं। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ‘जैसा चल रहा है’ वाला नजरिया अब व्यावहारिक नहीं है और कारोबार के विस्तार, ग्राहकों को आकर्षित करने, डिजिटल बदलाव करने, नवाचार और ग्राहकों की बेहतर सेवा पर ध्यान देने के लिए सुधारों की जरूरत है।
समिति ने शासन, नियामक अनुपालन, क्षमता निर्माण और डिजिटलीकरण में सुधार में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, सहकारी समितियों, दिल्ली राज्य सहकारी बैंक, नाबार्ड, नैबकॉन और कुछ शहरी सहकारी बैंकों के प्रतनिधियों ने हिस्सा लिया।