प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
कैश लॉजिस्टिक्स उद्योग ने एटीएम में नकदी भरने के लिए मांग-आधारित मॉडल का प्रस्ताव दिया है। इससे कैश-वैन की अनावश्यक आवाजाही और ईंधन की खपत को कम किया जा सकेगा। ईंधन की बढ़ती कीमतों और मजदूरी लागत ने इस क्षेत्र की परिचालन अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव डाला है।
कैश लॉजिस्टिक्स एवं नकदी प्रबंधन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संघ करेंसी साइकल एसोसिएशन (सीसीए) ने कहा कि एटीएम में नकदी भरने की आवृत्ति को एकसमान लोडिंग चक्र के बजाय नकदी निकालने के असल पैटर्न और लेनदेन की रफ्तार के हिसाब से तय किया जाना चाहिए। प्रस्तावित मॉडल के तहत ज्यादा भीड़भाड़ वाले एटीएम को जरूरत के हिसाब से सेवा मिलती रहेगी। मगर कम इस्तेमाल होने वाली एटीएम मशीनों में हर दूसरे दिन या जरूरत के हिसाब से नकदी भरा जा सकता है। यह प्रस्ताव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया की स्थिति के मद्देनजर ईंधन बचाने के लिए प्रधानमंत्री की अपील के बीच आया है।
एसोसिएशन ने कहा कि कैश लॉजिस्टिक्स उद्योग सबसे अधिक वाहनों का इस्तेमाल करने वाले सेवा क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यह उद्योग भी अनावश्यक यात्राओं को कम करके और मार्गों को बेहतर बनाकर अपना योगदान देना चाहता है।
करेंसी साइकल एसोसिएशन के महासचिव यूएस पालीवाल ने एक बयान में कहा, ‘सड़क पर चलने वाला हर कैश वैन ईंधन खती है। आवाजाही पर निर्भर उद्योग के रूप में हमारा मानना है कि हमारे पास ईंधन की खपत कम करने की प्रधानमंत्री की अपील के साथ कदम मिलाने की जिम्मेदारी और अवसर दोनों हैं।’
पालीवाल ने कहा, ‘कम इस्तेमाल वाले एटीएम में हर दिन के बजाय एक निर्धारित आवृत्ति या मांग के अनुसार नकदी भरने से हम सड़कों पर होने वाली अनावश्यक यात्राओं को कम कर सकते हैं, ईंधन बचा सकते हैं और अपने काम को अधिक कुशल बना सकते हैं। ऐसा हम आम लोगों के लिए नकदी की उपलब्धता से कोई समझौता किए बिना कर सकते हैं।’
एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित मॉडल के तहत एटीएम में नकदी की उपलब्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस कवायद का मकसद सेवाओं में कटौती करना नहीं बल्कि मार्गों को बेहतर बनाना है।
सीसीए ने इस प्रस्ताव के साथ-साथ ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को अलग से एक पत्र भी लिखा है जिसमें कैश लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में परिचालन खर्चों में आई भारी बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया गया है। एसोसिएशन ने पत्र में कहा है, ‘मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसका सीधा असर कैश वैन की आवाजाही और मार्गों के परिचालन खर्च पर पड़ रहा है।’