उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) 15 जून को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नया उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) और संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) जारी करने जा रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि नए सूचकांकों में मासिक उत्पादन पीपीआई (वस्तुएं), प्रायोगिक मासिक इनपुट पीपीआई (वस्तुएं) और त्रैमासिक सेवा पीपीआई शामिल होंगे। हालांकि 2011-12 को आधार वर्ष मानकर जारी की गई मौजूदा डब्ल्यूपीआई श्रृंखला के स्थान पर नई श्रृंखला आएगी।
पीपीआई की शुरुआत का उद्देश्य प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ अधिक निकटता से जोड़ना और यह स्पष्ट करना है कि उत्पादकों द्वारा इनपुट वस्तुओं पर अनुभव की जाने वाली महंगाई उत्पादित वस्तुओं पर किस प्रकार प्रभाव डालती है।
मंत्रालय के अनुसार आउटपुट और इनपुट पीपीआई डब्ल्यूपीआई के विपरीत महंगाई की दोहरी गणना को समाप्त करने का अवसर प्रदान करता है। डीपीआईआईटी के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘आप दीर्घकाल दोहरी अपस्फीति करने की स्थिति में होंगे।’
मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक अनुबंधों में मूल्य वृद्धि खंडों में डब्ल्यूपीआई के व्यापक उपयोग को देखते हुए संशोधित श्रृंखला जारी होने की तारीख से पांच वर्षों तक डब्ल्यूपीआई को पीपीआई के साथ जारी किया जाएगा और उसके बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। मंत्रालय ने आगे कहा, ‘इससे उपयोगकर्ताओं को डब्ल्यूपीआई से पीपीआई में बदलने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।’
महतो ने कहा कि पीपीआई में परिवर्तन शुरू होने के बावजूद डब्ल्यूपीआई महंगाई का आधिकारिक माप बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के जल्द ही परिपत्र जारी किए जाने की उम्मीद है। इसमें उपयोगकर्ताओं को सूचित किया जाएगा कि अगले पांच वर्षों में वाणिज्यिक अनुबंधों को धीरे-धीरे डब्ल्यूपीआई से पीपीआई में बदल देना चाहिए।
नई डब्ल्यूपीआई श्रृंखला में 697 के बजाय 957 मदें होंगी और इसमें सौर, पवन और परमाणु बिजली को विद्युत समूह के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं से हटाकर ‘ईंधन और बिजली’ समूह में स्थानांतरित कर दिया गया है जबकि शुद्ध व्यापार मूल्य के बजाय सकल उत्पादन मूल्य (जीवीओ) का उपयोग करके भार की पुनर्गणना की गई है।