संरक्षणवाद की गलती न दोहराए दुनिया: मनमोहन

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 10:44 PM IST

आर्थिक मंदी के निदान के वास्ते आम सहमति बनाने के लिए लंदन में हो रहे दुनिया के 20 विकसित देशों जी-20 के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया को संरक्षणवाद की पुरानी गलती दोहराने से बाज आने को कहा है।
सिंह ने कहा कि वित्तीय संकट के मद्देनजर सरकारों को कर चोरों की सैरगाह बन चके स्थानों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान करना चाहिए। उनके मुताबिक, सभी देशों को चाहिए कि इसमें बाधक नियम-कानूनों की बारीक समीक्षा की जाए।
इस आयोजन के मेजबान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन द्वारा जी-20 के नेताओं के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में सिंह ने कहा कि औद्योगिक देशों का संरक्षणवाद की ओर झुकाव विकासशील देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने संरक्षणवाद के लोभ के प्रति आगाह किया और कहा कि यह बहुत गंभीर चुनौती है। विकसित देशों को चाहिए कि वे अपनी जनता को पिछली गलतियां ना दोहराने के लिए समझाएं। मनमोहन सिंह के मुताबिक, यह मंदी महामंदी इसलिए हुई क्योंकि कई देशों ने संरक्षणवाद को बढ़ावा दिया। इससे आर्थिक गतिविधियों में लगातार गिरावट होती गई।
प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया को यह समझना चाहिए कि विकासशील देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण के लिए जनता का भय और उसकी आशंकाएं दूर करने के लिए कितनी कोशिश की और कितना जोखिम उठाया। यदि इस समय औद्योगिक देशों ने अपने बाजार खुले न रखे तो जो उपलब्धि हमने कड़ी मेहनत के बाद हासिल की वह मिट्टी में मिल जाएगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि मौजूदा संकट पिछले 60 साल का सबसे बुरा दौर है। यदि इसे न रोका गया तो लोगों के बीच नकारात्मक सोच पैदा होगी और यह संकट और गहरा जाएगा। सिंह के मुताबिक, किसी वैश्विक संकट का समाधान वैश्विक ही होना चाहिए। गत नवंबर में वॉशिंगटन में हुए सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां हमने वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए वित्तीय क्षेत्र में सुधार करने और नई संस्थाओं की स्थापना का संकल्प लिया था।
वैश्विक बैंकिंग प्रणाली में दीर्घकालीन सुधार पर जोर देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इस संकट ने बैंकों और वित्तीय क्षेत्र के अन्य हिस्सों के कामकाज के तौर-तरीके की मूलभूत खामियों को उजागर किया हैञ इन खामियों के चलते ही जोखिम खतरनाक स्तर तक बढ़ गए थे।
उनके मुताबिक, संकट को दोबारा आने से रोकने के लिए मजबूत विनियमन और व्यवस्थित निगरानी व्यवस्था की स्थापना करनी होगी। हालांकि इस क्षेत्र में सुधार के लिए गठित कार्यसमूह ने रूपरेखा तैयार करने की दिशा में बहुमूल्य कार्य कर लिए हैं। अब वित्तीय प्रणालियों के हल्के नियमन से काम नहीं चलेगा।

First Published : April 2, 2009 | 10:24 PM IST