वित्तीय दबाव से जूझ रही दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया को सरकार से बड़ी राहत मिली है। दूरसंचार विभाग ने कंपनी को 15,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी लौटा दी है। इससे नकदी के मोर्चे पर कंपनी को अपना परिचालन जारी रखने में काफी मदद मिलेगी। सरकार ने यह पहल अपने दूरसंचार सुधार पैकेज के तहत कर है।
पिछले साल सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र देने के लिए दूरसंचार राहत पैकेज की घोषणा की थी। उसके तहत लाइसेंस शुल्क एवं स्पेक्ट्रम बकाये के लिए बैंक गारंटी की आवश्यकता को कम कर दिया गया था। वोडाफोन आइडिया ने सरकार द्वारा बैंक गारंटी लौटाए जाने की पुष्टि की है लेकिन यह नहीं बताया है कि कितनी रक म लौटाई गई है।
इससे पहले वोडाफोन आइडिया को लाइसेंस शुल्क संबंधी 2,000 करोड़ रुपये की गारंटी लौटाई गई थी। जानकारों का कहना है कि
दूरसंचार कंपनी की स्पेक्ट्रम संबंधी गारंटी की रकम करीब 15,000 करोड़ रुपये है। सरकार ने पिछले कुछ दिनों में यह रकम दूरसंचार कंपनी को लौटा दी है।
वोडाफोन आइडिया की 15,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी वर्ष 2012 से 2016 के दौरान स्पेक्ट्रम
नीलामी से संबंधित है। दूरसंचार कंपनी ने अपने बकाये के भुगतान के लिए चार वर्षों की मोहलत का विकल्प चुना है। इस प्रकार नीलामी से संबंधित उसकी मौजूदा बैंक गारंटी लौटा दी गई है। जानकारों का कहना है कि सरकार द्वारा बैंक गारंटी लौटाने से वोडाफोन आइडिया को काफी राहत मिलेगी लेकिन उसे नए सिरे से निर्धारित बैंक गारंटी का अनुपालन करना होगा। दूरसंचार कंपनी को अब भुगतान के लिए अगली किस्त के बराबर रकम गारंटी के तौर पर रखनी पड़ेगी। इसमें भुगतान की अगली तारीख से 13 महीने पहले का बकाया भी शामिल है। बैंक गारंटी की वापसी के साथ ही वोडाफोन आइडिया ने उम्मीद जताई है कि उसे बैंकों से फंड एवं लेटर ऑफ क्रेडिट जैसी गैर-फंड सुविधाएं मिल सकेंगी। कंपनी इस रकम का उपयोग वेंडर फाइनैंसिंग आदि में करने की योजना बना रही है। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी अक्षय मूंद्रा ने जनवरी में यह बात कही थी।