वित्तीय संकट के कारण सेज परियोजनाओं के विकास पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
ताजा मामले में गुजरात के जामनगर में 1,125 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) विकसित करने की योजना से एस्सार ग्रुप ने हाथ पीछे खींच लिया है। परियोजना के लिए एस्सार को जमीन देने के मामले पर भी काफी विवाद हुआ था।
प्रस्तावित सेज में 1.6 से 20 करोड़ टन सालाना क्षमता वाले पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना थी। जिस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च किया जाना था। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि एस्सार ने इस परियोजना से हटने की बात कही है।
वैसे, इस परियोजना के लिए जमीन का भी अधिग्रहण किया जा चुका था। हालांकि सेज परियोजना की मंजूरी का मामला बोर्ड ऑफ एप्रूवल के पास है, जिसे इस बात की पुष्टि करनी थी कि प्रस्तावित सेज कर मुक्त औद्योगिक क्षेत्र के तौर पर विकसित हो।
लेकिन अगस्त में हुई बोर्ड की बैठक में जामनगर सेज डेवलपर्स लिमिटेड की ओर से जमीन अधिग्रहण की सही जानकारी नहीं मुहैया कराई गई थी।
परियोजना से पीछे हटने के बारे में एस्सार को भेजे गए ई-मेल का भी कंपनी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। सेज परियोजनाओं से पीछे हटने वाली एस्सार पहली कंपनी नहीं है। कुछ समय पहले ही डीएलएफ ने दिल्ली में प्रस्तावित सेज बनाने से इनकार कर दिया।
कंपनी का कहना है कि वित्तीय संकट की स्थिति में ऐसा करना पड़ा। अगस्त माह में एस्सार की ओर से बोर्ड ऑॅफ एप्रूवल को कहा गया था कि सेज के लिए प्रस्तावित क्षेत्र के आकार को कम किया जाए।
इसके साथ ही इस जोन को मल्टी प्रोडक्ट सेज के तौर पर विकसित किया जाना था, जबकि एस्सार का कहना था कि इसे खास क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए, जो पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम पर केंद्रित हो।
कंपनियां करने लगीं किनारा
जामनगर में प्रस्तावित सेज से एस्सार ने हाथ खींचा
1,125 हेक्टेयर क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल के लिए विकसित किया जाना था