सत्यम के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाली टेक महिंद्रा का कुल बाजार पूंजीकरण 10,039 करोड़ रुपये (इसमें सत्यम की पूंजी भी शामिल) है।
कंपनी को उम्मीद है कि इस सौदे के पूरा होने पर वह देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी बन जाएगी। कंपनी सत्यम की 31 फीसदी हिस्सेदारी 58 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदेगी।
यानी सत्यम की कुल बाजार पूंजी करीब 5,664 करोड़ रुपये है। वैसे, टेक महिंद्रा की वर्तमान बाजार पूंजी करीब 4,375 करोड़ रुपये है। यानी टेक महिंद्रा ने अपने से बड़ी कंपनी के लिए बोली लगा एक बड़ा दांव खेला है।
जहाज डूबता देख हुए किनारे
सत्यम कंप्यूटर के कर्मचारियों की संख्या अब घटकर 48,000 रह गई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में मार्च से सितंबर की अवधि के दौरान 5,000 कर्मचारियों ने सत्यम की नौकरी को छोड़ दिया।
सत्यम के लिए सबसे बड़े बोलीदाता की घोषणा करते हुए कंपनी के सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक मंडल के चेयरमैन किरण कार्णिक ने कहा कि चौथी तिमाही के अंत तक कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 48,000 रह गई थी। इनमें से 43,500 कर्मचारी सीधे सत्यम कंप्यूटर के हैं, जबकि शेष कंपनी की सहायक इकाइयों, कॉन्ट्रेक्ट और सब कॉन्ट्रेक्ट पर हैं।
कार्णिक ने बताया कि बीते वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत तक कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 53,000 थी। तीसरी तिमाही के दौरान 2,000 कर्मचारियों ने कंपनी का साथ छोड़ा और इनकी संख्या घटकर 51,000 रह गई थी।
सत्यम गाथा
1987: रामलिंग राजू ने सत्यम कंप्यूटर्स की नींव रखी।
2006: कमाई के मामले में सत्यम ने 1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड तोड़ा।
2007: कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए सत्यम को गोल्डन पीकॉक अवार्ड।
16 दिसंबर, 08: राजू ने मायटास इन्फ्रा और मायटास प्रॉपर्टीज खरीदने की घोषणा की।
17 दिसंबर: निवेशकों के विरोध के चलते अधिग्रहण सौदे से पीछे हटना पड़ा।
7 जनवरी, 09: राजू का इस्तीफा और 8 हजार करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा।
9 जनवरी, 09: राजू और उसके भाई गिरफ्तार। सरकार की ओर से नए बोर्ड का गठन।
27 जनवरी, 09: नए बोर्ड ने सत्यम को बेचने की प्रक्रिया शुरू की।
6 मार्च, 09: सेबी की ओर से 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति।
13 अप्रैल, 09: टेक महिंद्रा ने सबसे अधिक बोली लगाकर सत्यम पर जमाया कब्जा।