डीयर पर बदला टेल्को का गियर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 8:18 PM IST

वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा मोटर्स और दूसरी सबसे बड़ी कंपनी अशोक लीलैंड आमने सामने आ गई हैं।
मामला निर्माण उपकरण बनाने वाली नामी अमेरिकी कंपनी जॉन डीयर से जुड़ा है, जिसके साथ अशोक लीलैंड के प्रस्तावित साझे उपक्रम के विरोध में टाटा मोटर्स की सहयोगी कंपनी टेल्को उतर आई है।
जॉन डीयर कंस्ट्रक्शन भारतीय बाजार में अपने उपकरणों की पैठ बनाने के लिए अशोक लीलैंड के साथ संयुक्त उपक्रम लगाने की योजना बना रही है। इस बात पर टेल्को कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (टेल्कॉन) को कड़ा ऐतराज है। टेल्कॉन में टाटा मोटर्स की 60 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि बाकी हिस्सेदारी हिताची कंस्ट्रक्शन मशीनरी की है।
इस कंपनी ने विनिर्माण में काम आने वाले लोडर्स बनाने के लिए जॉन डीयर के साथ तकनीक लाइसेंस समझौता किया है। विदेशी निवेश से जुड़े भारतीय कानूनों के तहत जॉन डीयर को किसी दूसरी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम लगाने के लिए पहले टेल्कॉन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल करना होगा।
टेल्कॉन ने जॉन डीयर को एनओसी देने से मना कर दिया है। इस मामले पर पिछले महीने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) में बातचीत भी हुई और 20 मार्च को इस मामले पर फिर  सुनवाई होगी। इस मामले को सुलझाने के लिए औद्योगिक नीति और योजना विभाग, भारी उद्योग विभाग के अधिकारियों के अलावा आर्थिक सलाहकार और एफआईपीबी के निदेशक सभी पक्षों को सुनने के बाद बोर्ड के सामने अपनी राय रखेंगे। 
इस मामले पर अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक आर शेषशायी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘यह मामला जॉन डीयर से जुड़ा है। इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।’ एफआईपीबी को लिखे पत्र में टेल्कॉन ने कहा है कि कंपनी ने भारत में लोडर्स बनाने के लिए जॉन डीयर के साथ अक्टूबर 1996 में एक समझौता किया था।
हालांकि, इस समझौते की वैधता जुलाई 2006 में समाप्त हो गई। लेकिन इससे पहले नवंबर 2005 में ही टेल्कॉन ने इस दिग्गज अमेरिकी कंपनी से अपने साथ आगे भी जुड़े रहने की गुजारिश की थी और उसका ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने की इजाजत भी मांगी थी।
जॉन डीयर से कोई जवाब न आने पर उसने दिसंबर 2007 में फिर अनुमति मांगी, जिस पर उसे मार्च 2008 में तल्खी भरा जवाब मिला। जॉन डीयर ने टेल्कॉन पर ट्रेडमार्क का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। डीयर ने संकेत दिए कि ट्रेडमार्क का प्रयोग जारी रखने पर वह टेल्कॉन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से नहीं हिचकेगी। इसके बाद टेल्कॉन ने डीयर का ट्रेडमार्क इस्तेमाल नहीं किया।
टेल्कॉन ने इस प्रस्तावित उपक्रम पर आपत्ति जताते हुए एफआईपीबी को लिखा है, ‘हम अपनी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ऐसे ही उत्पाद बना रहे हैं। अगर इस कारोबार में सोचे समझे तरीके से और बेहतर तकनीक के इस्तेमाल से काम होगा, तो हमारे कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा जॉन डीयर और अशोक लीलैंड के बीच साझेदारी से देश में कारोबारी भावना बिगड़ेगी और  अर्थव्यवस्था पर भी खासा बुरा असर पड़ेगा।’
दूसरी ओर जॉन डीयर टेल्कॉन की बात से साफ इनकार कर रही है। उसका कहना है कि टेल्कॉन के साथ उनका अनुबंध पहले ही समाप्त हो चुका है। उसने यह भी कहा कि इस समय उनका किसी भी दूसरी भारतीय कंपनी के साथ किसी भी प्रकार का तालमेल या साझा उपक्रम नहीं है, इसलिए उसे अशोक लीलैंड के साथ उपक्रम बनाने से इनकार करने की कोई वजह नहीं है।
आ गईं आमने सामने
जॉन डीयर-अशोक लीलैंड के साझे उपक्रम पर टेल्कॉन को आपत्ति
पहले जॉन डीयर और टाटा में अरसे तक रही है जुगलबंदी
संयुक्त उपक्रम के विरोध में टाटा ने एफआईपीबी को लिखा पत्र
टाटा का कहना कि अपनी तकनीक से ही बना रहे हैं बेहतर उत्पाद

First Published : March 17, 2009 | 10:06 PM IST