टाटा संस ने सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया और उसकी सहायक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस की जांच-परख की प्रक्रिया शुरू की है। सूत्रों ने बताया कि समूह ने इसके लिए बेन ऐंड कंपनी और सीबरी ग्रुप को नियुक्त किया है। जांच-परख की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वित्तीय बोली जमा की जाएगी।
इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों ने बताया कि इस विमानन कंपनी के अधिग्रहण के लिए सौदे को इस साल के अंत तक अथवा उससे पहले अंतिम रूप दिया जा सकता है। टाटा समूह ने एयर इंडिया के विलय के बाद उसे अपने मौजूदा विमानन कारोबार के साथ एकीकृत करने संबंधी योजना तैयार करने के लिए डेल्टा और यूनाइटेड एयरलाइंस से विमानन कारोबार के दिग्गजों को भी लाया है। टाटा संस विस्तारा और एयरएशिया इंडिया का परिचालन करती है। सिंगापुर एयरलाइंस के साथ संयुक्त उद्यम विस्तारा में टाटा संस की 51 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि एयरएशिया इंडिया में उसकी 83.67 फीसदी हिस्सेदारी है।
टाटा संस ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया। एक सूत्र ने कहा, ‘एयर इंडिया के सभी कारोबार की जांच-परख के लिए विभिान्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाली कई टीम गठित की गई है। इनमें विमानन कंपनी के बेड़े की क्षमता, मार्ग संबंधी अर्थशास्त्र और विमान, इंजन उपकरण एवं अन्य परिसंपत्तियों के खरीद सौदे शामिल हैं।’
पिछले सप्ताह एयरएशिया इंडिया और विस्तारा के अधिकारियों की एक टीम ने परिसंपत्तियों के सत्यापन के लिए कलिना में एयर इंडिया की इंजीनियरिंग सेवा इकाई का दौरा किया। समूह ने कई विभाग प्रमुखों के साथ बैठकें भी की। भारत में कोविड वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के प्रकोप और विभिन्न देशों द्वारा उड़ान सेवाओं पर रोक लगाए जाने से जांच-परख की प्रक्रिया में काफी देरी हुई है।
इस मामले से अवगत एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि टाटा समूह ने एयर इंडिया के बेड़े, अनुबंध, द्विपक्षीय अधिकार, हवाई अड्डा स्लॉट, विमानों के रखरखाव, रिकॉर्ड एवं मार्ग आदि विभिन्न पहलुओं को कवर करते हुए हजारों सवाल पूछे हैं। एक सलाहकार ने कहा, ‘बोलीदाता मिनट संबंधी विवरण तलाश रहे हैं। तमाम आंकड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं लेकिन संभावित खरीदारों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि एयर इंडिया के वास्तविक दायित्व, उसकी प्रतिबद्धताओं और सहायक इकाइयों के साथ उसके कारोबारी संबंध को समझा जाए।’
योजना से अवगत लोगों ने कहा कि फिलहाल टाटा समूह अकेले इस विमानन कंपनी के अधिग्रहण की योजना बना रहा है क्योंकि उसकी साझेदार सिंगापुर एयरलाइंस ने इस प्रक्रिया से जुडऩे में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह का मानना है कि फुल सर्विस और सस्ती विमानन सेवा यानी दोनों श्रेणियों में कारोबार बढ़ाने की आवश्यकता है।
शुरू में समूह ने एयर इंडिया का विलय विस्तारा में करने की योजना बनाई थी और यूरोप एवं अमेरिका जैसे लंबी दूरी के भीड़-भाड़ वाले मार्गों पर ध्यान केंद्रित किया था। लेकिन एयर इंडिया एक्सप्रेस का विलय एयरएशिया इंडिया के साथ किया जा सकता है ताकि घरेलू बाजार और 5 घंटे की दूसरी वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सस्ती विमानन सेवा कारोबार को रफ्तार दी जा सके।
टाटा संस सरलीकरण और सुदृढीकरण के लिए अपने विमानन कारोबार को पुनर्गठित करने की योजना बना रही है। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा कि बॉम्बे हाउस में मौजूद प्रबंधन का मानना है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में लाभप्रद होने के लिए सस्ती विमानन सेवा क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।