सेबी संग सहमति से निपटान चाहती है सन फार्मा

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 4:21 AM IST

दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स, उसके अहम अधिकारी और निदेशकों ने बाजार नियामक सेबी के पास सहमति याचिका दाखिल की है। सेबी उस कंपनी के अहम वितरक और सहायक आदित्य मेडिसेल्स की तरफ से खुलासा नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े विवाद का निपटान कर रहा है। सेबी ने दवा कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ सेबी के अधिनियम की धारा 15 (जो जुर्माने से जुड़ी धारा है) के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। नियामक ने लॉकडाउन के दौरान कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है, जिसमें नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है और यह भी पूछा गया है कि क्यों न उन पर वित्तीय जुर्माना लगाए जाए।
सहमति की व्यवस्था के तहत नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने वाला सेबी के साथ लंबित मामलों का निपटारा गड़बड़ी स्वीकार करके या उससे इनकार के जरिये कर सकता है। सूत्रों ने कहा कि सन फार्मा और उसके कम से कम 10 निदेशकों ने सहमति करार जमा कराए हैं। इस बारे में जानकारी के लिए सन फार्मा को शुक्रवार को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।
सेबी के जांच विभाग ने फरवरी में जांच पूरी कर ली थी और इस मामले में अधिनिर्णयन कार्यवाही की सिफारिश की थी। जांच से पता चलता है कि दवा निर्माता ने आदित्य मेडिसेल्स को संबंधित पक्षकार के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जबकि इसके लाभार्थी सन फार्मा के प्रवर्तक थे। इसका खुलासा तय सूचीबद्धता नियमों के तहत होना चाहिए था।
सुपर स्टॉकिस्ट आदित्य मेडिसेल्स को वित्त वर्ष 2018 में संबंधित पक्षकार घोषित किया गया। सूत्रों ने कहा कि सेबी इस सहमति आवेदन के प्रक्रियागत पहलू की जांच कर रहा है और उसके मुताबिक फैसला लेगा। सहमत के ढांचे के तहत सेबी के अधिकारी आवेदन मिलने के बाद मामले के कुछ निश्चित पहलू की जांच करता है और अपनी टिप्पणी देता है।
उसके बाद यह आवेदन उच्चाधिकार सलाहकार समिति के पास जाता है, जो सभी तथ्योंं व परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद मामले के गुण-दोष पर विचार करती है। उसके बाद यह समिति सुझाव देती है कि क्या आवेदन को स्वीकार किया जा सकता है। तब दो पूर्णकालिक सदस्यों की समिति सिफारिशों पर विचार करती है और आदेश पारित करती है।
सेबी की जांच के नतीजे में सन फार्मा और आदित्य मेडिसेल्स के बीच हुए कारोबारी व्यवस्था का खुलासा न किए जाने को रेखांकित किया गया हैऔर उसे वितरक के तौर वर्गीकृत किया गया है, जो सेबी की सूचीबद्धता नियम व खुलासा की अनिवार्यताओं का स्पष्ट उल्लंघन है।
मोटे तौर पर वितरक थर्ड पार्टी होता है, जो विनिर्माता से दवा खरीदता है और मार्जिन पर ग्राहकों को बेचता है। हालांकि इस मामले में सन फार्मा उस वितरक के साथ काम कर रही थी, जो उसकी सहायक भी है।
हालांकि बाद में सन फार्मा ने आदित्य मेडिसेल्स के साथ अपने संबंधों का खुलासा किया, जो दवा वितरण कंपनी है। आदित्य मेडिसेल्स को सन फार्मा की तरफ से प्रवर्तक शेयरधारक के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। 31 दिसंबर, 2018 को उसके पास सन फार्मा की 1.6 फीसदी हिस्सेदारी थी। सन फार्मा का देसी फॉम्र्युलेशन कारोबार पूरी तरह से इसी के जरिये होता है।
यह दूसरा मौका है जब सन फार्मा ने सेबी के साथ निपटान का अनुरोध किया है। इससे पहले कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी व नौ अन्य ने भेदिया कारोबार मामले का निपटान किया था और 2017 में निपटान करते वक्त 18 लाख रुपये चुकाए थे। दिसंबर 2018 में सेबी ने व्हिसलब्लोअर की शिकायत के बाद जांच शुरू की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सन फार्मा कॉरपोरेट गवर्नेंस व कर के अलावा प्रतिभूति बाजार से संबंधित नियमों का उल्लंघन कर रही है। उसके बाद सितंबर 2019 में व्हिसलब्लोअर की शिकायतों की जांच के लिए ऑडिट का आदेश दिया गया था।

First Published : July 26, 2020 | 11:26 PM IST