प्रमुख वाहन कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के स्वामित्व वाली सांगयोंग मोटर ने दिवालिया के लिए आवेदन किया है। हालांकि विदेश में किए गए अधिग्रहण के विफल रहने के तमाम उदाहरण मौजूद हैं लेकिन किसी भारतीय कंपनी द्वारा कोर्ट रिसीवरशिप से खरीदी गई कंपनी के दिवालिया होने की बात पिछले एक दशक के दौरान सुनने में नहीं आई थी।
एसवाईएमसी ने सोमवार को कोरियाई स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में सूचित किया। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में यह खुलासा किया है। कंपनी ने कहा कि सांगयोंग ने सोल दिवालिया अदालत के साथ पुनरुद्धार प्रक्रिया की जानकारी भी कोरियाई स्टॉक एक्सचेंज को दी है।
करीब एक सप्ताह पहले नकदी संकट से जूझ रही इस वाहन कंपनी ने दक्षिण कोरिया के जेपी मॉर्गन चेस बैंक को 60 अरब केरियाई वोन के भुगतान में चूक की थी। कंपनी को यह भुगतान 14 दिसंबर तक
करना था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष आदित्य मखारिया ने कहा, ‘एक भारतीय कंपनी द्वारा अधिग्रहीत इस कंपनी द्वारा दायर दिवालिया याचिका खतरे की घंटी हो सकती है क्योंकि ऐसा मामला विरले ही सामने आता है। लेकिन इसे मौजूदा संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि वैश्विक महामारी के इस दौर में तमाम कंपनियां दिवालिया हो गई हैं।’ उन्होंने कहा कि महिंद्रा ऐंड महिंदद्रा पूंजी आवंटन को लेकर काफी गंभीर है और वह किसी कठिन कारोबार में रकम लगाने के लिए तैयार नहीं है।
ताजा घटनाक्रम से महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की वित्तीय स्थिति पर कोई प्रभाव पडऩे की संभावना नहीं है। वित्त वर्ष 2020 की मार्च तिमाही में उसे इम्पेयरमेंट का झटका लग चुका है। उसी झटके के कारण महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने तिमाही के दौरान 530 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड नुकसान दर्ज किया था जो पिछले 19 वर्षों में उसका सबसे बड़ा नुकसान है। चालू वित्त वर्ष के आरंभ से ही उसने अपने कोरियाई परिचालन में नए निवेश करना बंद कर दिया था।
एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख महंतेश सबरद ने कहा, ‘मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उन्हें (महिंद्रा ऐंड महिंद्रा) को बाहर निकलने में इतना लंबा समय लगा। अब जो 2020 में किया जा रहा है वह तीन-चार साल पहले किया जाना चाहिए था।’
अपने घरेलू बाजार में किया और हुंडई से मिल रही तगड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनी अपनी बिक्री बढ़ाने में असमर्थ रही। इसके अलावा निर्यात बाजार में उतार-चढ़ाव भी उसकी एक बड़ी चुनौती रही। कंपनी को अपने स्वामित्व में भी तमाम बदलावों का सामना करना पड़ा। उसे 1997 में देवू मोटर कॉर्प से लेकर 2004 में एसएआईसी और 2009 में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के रूप में नए स्वामित्व से जूझना पड़ा।
सांगयोंग मोटर कंपनी का अतीत
* दिसंबर 1997: सांगयोंग ग्रुप ने सांगयोंग मोटर कॉर्प की बिक्री देवू मोटर कंपनी को की
* मार्च 2002: देवू ने दिवालिया के लिए आवेदन किया
* अक्टूबर 2004: एसएआईसी ने एसवाईएमसी में 48.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी
* जनवरी 2009: एसवाईएमसी ने दिवालिया के लिए आवेदन किया
* नवंबर 2010: एमऐंडएम ने एसवाईएमसी के अधिग्रहण की घोषणा की
* कैलेंडर वर्ष 2016: एसवाईएमसी ने 306.8 करोड़ डॉलर का लाभ कमाया जो पिछले 9 वर्षों में पहली बार हुआ
* कैलेंडर वर्ष 2019: एसवाईएमसी ने एक रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया
* फरवरी 2020: एमऐंडएम ने 3 वर्ष के लिए 42.3 करोड़ डॉलर की पुनरुद्धार योजना बनाई
* अप्रैल 2020: एमऐंडएम के बोर्ड ने निवेश प्रस्ताव को खारिज किया
* जून 2020: एमऐंडएम ने कहा कि वह एसवाईएमसी का नियंत्रण खत्म करेगी, साथी की तलाश। एसवाईएमसी में नुकसान के कारण एमऐंडएम को 3,215 करोड़ का रिकॉर्ड घाटा
* दिसंबर 2020: एसवाईएमसी ने जेपी मॉर्गन के ऋण की अदायगी में चूक की
* 21 दिसंबर 2020: एसवाईएमसी ने 11 साल में दूसरी बार दिवालिया के लिए आवेदन किया