सीमेंट कंपनियों की हिली बुनियाद

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 08, 2022 | 10:07 AM IST

आर्थिक मंदी का असर धीरे धीरे सीमेंट उद्योग पर भी दिखने लगा है और इसकी शुरुआत एसीसी से दिखने को मिली जिसने अपनी हिमाचल इकाई को बंद कर दिया है।


उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में कई और दूसरी सीमेंट कंपनियां भी लंबे समय तक मंदी की मार से नहीं बच पाएंगी और उन्हें भी कोई सख्त कदम उठाना पड़ सकता है।

24 लाख टन वाली गागल 2 संयंत्र पर ताला लगाने के बाद अब इस क्षेत्र में दूसरी इकाइयां या तो बंद की जा सकती हैं या फिर उनमें उत्पादन कम किया जा सकता है।

सीमेंट उत्पादन संगठन (सीएमए) के हालिया आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि उत्तर भारत में सीमेंट की खपत में महज 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उत्तरी क्षेत्र में शामिल 6 राज्यों में से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में खपत में 14 फीसदी की ऋणात्मक विकास दर देखने को मिली है।

वहीं राजस्थान और हरियाणा में खपत में क्रमश: 5 और 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि पूरे उद्योग की औसत विकास दर 7 फीसदी की रही है।

सीएमए के अध्यक्ष और राजस्थान के श्री सीमेंट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एच एम बांगुर ने बताया, ‘पाकिस्तान से आयात किए जाने वाले सीमेंट की वजह से सीमेंट कंपनियों, खासतौर पर उत्तर भारत की सीमेंट कंपनियों को इकाइयां बंद करनी पड़ रही हैं।’

आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र में 80 से 90 लाख टन की नई क्षमता जोड़ रही है जबकि, श्री ने पहले ही 30 लाख टन नई क्षमता का विकास कर लिया है। उत्तर भारत में जेपी, बिनानी, अंबुजा, जेके लक्षमी और जेके सीमेंट कुछ प्रमुख सीमेंट कंपनियां हैं।

एजेंल ब्रोकिंग में शोध विश्लेषक पवन ब्रूड ने बताया, ‘एसीसी के बाद अब दूसरी कंपनियों को भी कुछ ऐसा ही करना पड़ सकता है। अगर कंपनियों को इकाइयां बंद नहीं भी करना पड़े तो भी मौजूदा क्षमता के अनुरूप उत्पादन में कमी ला सकती हैं।’

सीमेंट कंपनियां उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर रही हैं और अप्रैल से नवंबर 2008 के बीच यह घटकर 85 फीसदी रह गया है जबकि, पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 93 फीसदी के करीब थी। वहीं उत्तरी क्षेत्र में श्री ने कहा है कि वह क्षमता के पूर्ण उपयोग को घटाकर 75 फीसदी तक ला सकते हैं।

एक विश्लेषक ने कहा, ‘ऐसी भी संभावना है कि कंपनियां जो अब तक हफ्ते में 6 से 7 दिन काम किया करती थीं अब वे हफ्ते में 4 दिन ही काम किया करेंगी। कंपनियां मांग ने होने के बाद भी उत्पादन कर भंडार बनाने से बचेंगी।’ कंपनियां नहीं चाहती हैं कि मांग नहीं होने की स्थिति में वे उत्पादन कर भंडार बढ़ाएं।

First Published : December 19, 2008 | 11:21 PM IST