अपनी स्थापना के बाद से पहली बार इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) को अपने प्लेसमेंट सीजन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा है।
इस साल संस्थान के 440 स्टूडेंट्स में से सिर्फ 250 (57 फीसदी) के पास नौकरियों के ऑफर हैं। इस संस्थान में प्लेसमेंट जनवरी में ही शुरू हो गया था। कायदे से तो संस्थान में प्लेसमेंट मार्च के अंत तक ही पूरा हो जाना चाहिए था।
दरअसल, अप्रैल के पहले हफ्ते में ग्रैजुएशन डे को लेकर का जोर-शोर से तैयारियां होती हैं। हालांकि, मंदी की मार के कारण इस प्रतिष्ठित बी-स्कूल के सारे छात्रों के पास इस बार नौकरियां नहीं हैं। गौरतलब है कि इसे 2009 के ग्लोबल एमबीए रैंकिंग के तहत फाइनैंशियल टाइम्स ने दुनिया का 15वें सबसे अच्छे बी-स्कूल का तमगा दिया था।
इस साल आईएसबी के छात्रों को मिले ऑफरों की तादाद में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस वजह से अपनी पसंद की नौकरी या कंपनी के इंतजार में वक्त गंवाए बिना ही छात्रों ने जो भी मिला, उसी को स्वीकार कर लिया। अप्रैल में ग्रैजुएट होने वाले छात्रों को अच्छी नौकरी की तलाश के लिए अगले कुछ महीनों तक संस्थान की सेवाएं मिलती रहेंगी।
आईएसबी छात्रों के साथ संपर्क में रहेगा और अच्छी नौकरी की तलाश में उनकी मदद करेगा। हालांकि, संस्थान ने छात्रों को नौकरियों दिलावाने के लिए कोई आखिरी तारीख तय नहीं की है। संस्थान के प्रवक्ता का कहना है कि, ‘हम तब तक रास्तों की तलाश जारी रखेंगे, जब तक हमारे सारे स्टूडेंट्स को उनकी क्षमता और अनुभव के हिसाब से नौकरी नहीं मिल जाती।’
इस साल कम नियोक्ताओं के आने का अनुमान संस्थान को काफी पहले ही लग गया था। इसलिए तो नवंबर से ही संस्थान के अधिकारियों ने नियोक्ताओं को बुलाने के लिए खुद ही उनके चक्कर लगाना शुरू कर दिया था। इससे पहले इस संस्थान ने ऐलान किया था कि वह मौजूदा 440 सीटों की तादाद को बढ़ाकर 560 से 600 तक कर सकता है। यह बात अभी तक साफ नहीं है कि अगर बाजार की हालत नहीं सुधरी, तो वह छात्रों को नौकरियां कैसे दिलवाएगा।
छात्रों को ऑफर की जाने वाली सैलरी में पहले ही गिरावट दर्ज का जा चुकी है। पहले उन्हें औसतन 18-20 लाख रुपये सालाना की सैलरी ऑफर की जाती थी, जो अब 13-15 लाख रुपये के स्तर तक सिमट चुकी है। पिछले साल करीब 230 कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आई थीं और उन्होंने 421 छात्रों को 657 ऑफर दिए थे।