दिग्गज दवा कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज को लगभग 300 करोड़ रुपये की चपत लगने की आशंका है।
विश्लेषकों के अनुसार ग्लैक्सो स्मिथलाइन की माइग्रेन की दवा इमिट्रैक्स के जेनेरिक संस्करण को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) की मंजूरी नहीं मिलने से उठाना पड़ सकता है।
एंजेल ब्रोकिंग के फार्मा विश्लेषक सरबजीत कौर ने बताया, ‘इमिट्रैक्स के जेनेरिक संस्करण को रैनबैक्सी को इस साल की आखिरी तिमाही के अंत तक अमेरिकी बाजार में उतारना था।
लेकिन कंपनी इस निर्धारित समय सीमा में इसका जेनेरिक संस्क रण पेश करने में नाकामयाब रही। इस कारण कंपनी को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।’
रैनबैक्सी को पिछले साल जनवरी में इमिट्रैक्स के जेनेरिक संस्करण को बाजार में उतारने का अधिकार मिला था। रैनबेक्सी को यह अधिकार ग्लैक्सो स्मिथलाइन के साथ कानूनी लड़ाई के बाद मिला था। इस के तहत रैनबैक्सी 180 दिनों के लिए अमेरिका में इमिट्रैक्स की बिक्री कर सकती थी।
इसके बाद रैनबैक्सी ने घोषणा की थी कि वह दिसंबर में 25 मिलीग्राम, 50 मिलीग्राम और 100 मिलीग्राम की श्रेणी में यह दवा बाजार में उतारेगी।
हालांकि, यूएसएफडीए की मंजूरी नहीं मिलने के कारण रैनबैक्सी अभी तक इस दवा को बाजार में नहीं उतार पाई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इमिट्रैक्स का सालाना बाजार 50 अरब रुपये का है।
प्रभुदास लीलाधर रिसर्च के प्रमुख (शोध) रंजीत कपाड़िया ने कहा, ‘रैनबैक्सी अभी तक इस दवा को अमेरिकी बाजार में नहीं उतार पाई है। फरवरी 2009 में कंपनी को मिली अवधि भी समाप्त हो रही है। इस कारण कंपनी को 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।’
रैनबैक्सी के प्रवक्ता ने बताया, ‘कंपनी इस दवा को अमेरिकी बाजार में उतारने के लिए यूएसएफडीए की मंजूरी का इंतजार कर रही है।’
पिछले साल सितंबर में यूएसएफडीए ने कंपनी की 30 दवाओं की अमेरिका में बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। कंपनी ने साफ कर दिया कि इमिट्रैक्स उन 30 दवाओं की सूची में शामिल नहीं है।