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Crude Oil Outlook: दूसरी छमाही में कच्चा तेल औसतन 72 डॉलर रहने के आसार: बोफा

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण साल की शुरुआत में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 42 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर अब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं

Published by
पुनीत वाधवा   
Last Updated- June 30, 2026 | 11:10 PM IST

बोफा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है, तो 2026 की दूसरी छमाही में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 72 डॉलर प्रति बैरल और 2027 में 65 डॉलर प्रति बैरल रहेंगी। उसने 2026 के लिए भारत के जीडीपी वृद्धि अनुमान को अप्रैल में बताए गए 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। 2027 के लिए भी अब उसने 7 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान दिया है।

बोफा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है, ‘सकारात्मक घटनाक्रम और उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए हमें उम्मीद है कि एशिया के उभरते देशों (चीन को छोड़कर) की वृद्धि 2026 में 5.9 प्रतिशत (अप्रैल के 4.9 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले) होगी और 2027 में 5.8 प्रतिशत रहेगी।’ उन्होंने इस साल के लिए वैश्विक वृद्धि का अनुमान थोड़ा बढ़ाकर 3.2 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.5 प्रतिशत कर दिया है।

तेल में नरमी

इस बीच, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण साल की शुरुआत में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 42 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर अब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। एसऐंडपी ग्लोबल मिंट और एसऐंडपी ग्लोबल कमोडिटीज ऐट सी के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 जून को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या का एक नया दैनिक रिकॉर्ड बना और 78 जहाज इस रास्ते से गुजरे।

एसऐंडपी ग्लोबल ने कहा, ‘जहाजों की आवाजाही में कुस 22 तेल और केमिकल टैंकर, 21 बल्क कैरियर, 12 कार्गो जहाज, 7 कंटेनर जहाज, 4 एलपीजी टैंकर और 2 एलएनजी टैंकर शामिल थे। कुल ट्रैफिक में आने वाले जहाजों की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी और इनमें से 41 प्रतिशत जहाज ईरान से जुड़े थे।’

फेड की दर वृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था

बोफा का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 5 प्रमुख थीमों पर केंद्रित है: ट्रंप की नीतियां, एआई में उछाल, चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, राजकोषीय असंतुलन और वैश्विक तरलता की अधिकता। बोफा ने चेतावनी दी है, ‘एआई बूम, राजकोषीय असंतुलन और सहज वित्तीय स्थिति ने अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए के-आकार के परिदृश्य को मजबूती दी है, लेकिनयही मजबूती तब कमजोरी बन सकती है जब परिसंपत्तियों की कीमतों में बड़ी गिरावट आ जाए।’

First Published : June 30, 2026 | 11:06 PM IST