पांच माह के अंतराल के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ शनिवार को बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है।
बैठक में मौजूदा आर्थिक हालात पर चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि आर्थिक मंदी पर विचार करने के लिए मनमोहन सिंह अंतिम बार नवंबर में उद्योगपतियों के साथ बैठक में शामिल हुए थे।
बैठक में जिन उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है, उनमें आईसीआईस्ीआई बैंक के के.वी. कामत, रिलायंस के मुकेश अंबानी, एडीएजी के अनिल अंबानी, बजाज ऑटो के राहुल बजाज, भारती एयरटेल के सुनील भारती मित्तल, एचडीएफसी के दीपक पारेख और आदित्य बिड़ला समूह के कुमारमंगलम बिड़ला शामिल हैं। इनके अलावा, सीआईआई, एफआईसीसीआई और एसोचैम के अध्यक्ष भी बैठक में शामिल हो सकते हैं।
फिक्की के अध्यक्ष और जेके पेपर के प्रबंध निदेशक हर्षपति सिंघानिया ने कहा कि प्रधानमंत्री से इस बात का आग्र्रह किया जाएगा कि मौजूदा विकास दर को बरकार रखने की कोशिश की जानी चाहिए। इसके साथ ही बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कटौती जैसे उपाय आगे भी उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों के दौरान 9 फीसदी की विकास दर के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में 7.1 फीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया गया है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 16 सालों में पहली बार भारत का औद्योगिक उत्पादन लगातार दो महीने-दिसंबर और जनवरी में गिरा है।
दिसंबर में आईआईपी 0.63 फीसदी रहा, जबकि जनवरी में यह 0.5 फीसदी रहा था। निर्यात मोर्चे पर भी देश को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल-जनवरी में निर्यात में डॉलर मद में करीब 13.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं जनवरी में निर्यात में 15.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इसका असर देश के रोजगार पर भी पड़ा और चमड़ा, परिधान, रत्न और आभूषण क्षेत्रों से जुड़े कई लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। हालांकि सरकार की ओर से मौजूदा हालात से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए। इनमें ब्याज दरों में कटौती और आरबीआई की ओर से बाजार में तरलता बढ़ाने के उपाय शमिल हैं।