पीरामल कैपिटल की योजना अपने खुदरा लोनबुक की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाकर 75 फीसदी करने और थोक उधारी नीचे लाने की है। यह शायद दीवान हाउसिंग फाइनैंस के अधिग्रहण के विभिन्न कारणों में से एक है।पीरामल की कुल लोनबुक करीब 45,000 करोड़ रुपये की है, जिसमेंं से खुदरा लोन की हिस्सेदारी 5,000 करोड़ रुपये यानी महज 11 फीसदी है।
पीरामल रिटेल फाइनैंस के मुख्य कार्याधिकारी जयराम श्रीधरन के मुताबिक, कंपनी की योजना इस वित्त वर्ष के आखिर तक खुदरा लोन की हिस्सेदारी 40 फीसदी के पार लाने का है। मध्यम अवधि में खुदरा लोन करीब दो तिहाई होगा और बाकी थोक लोनबुक होगा। पीरामल रिटेल फाइनैंस ने खुदरा फाइनैंसिंग प्लेटफॉर्म का विस्तार किया, जो छोटे व मझोले शहरों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह प्लेटफॉर्म अफोर्डेबल हाउसिंग लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, सिक्योर्ड स्मॉल बिजनेस लोन, परचेज फाइनैंस, असुरक्षित कर्ज और पुरानी कारों पर कर्ज मुहैया कराएगा। अल्पावधि में यह शिक्षा ऋण व दोपहिया के लिए भी कर्ज देना शुरू करेगा।
इस समूह को लक्षित डीएचएफएल खुदरा उधारी वाली इकाई का हिस्सा होगा और फर्म का नाम बदला जा सकता है। श्रीधरन ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, जब डीएचएफएल हमारी झोली में आएगा तब हमारा कारोबार के साथ काफी ज्यादा मॉर्गेज होगा। ऐसे में हम नॉन-मॉर्गेज योजनाएं भी पेश कर रहे हैं ताकि हम उन्हें आसानी से बेच सकें। डीएचएफएल के अधिग्रहण पर अभी दिवालिया अदालत से मंजूरी लंबित है।
श्रीधरन ने कहा कि डीएचएफएल में धोखाधड़ी वाली खबर नई बात नहीं है और ग्रांट थॉर्नटन के फॉरेंसिक ऑडिट में पहले ही चीजें सामने आ चुकी हैं। उन्होंने कहा, हमें इस मोर्चे पर किसी तरह की चिंता नहीं है। मीडिया में धोखाधड़ी की जो भी खबरें आ रही है, वह पहले ही बाहर आ चुकी थी। इस मोर्चे पर चौंकाने वाली कोई चीज नहीं है। पीरामल रिटेल ने फिनटेक कंपनियों मसलन कार्स 24, जेस्टमनी और इंडियन मॉर्गेज गारंटी कॉरपोरेशन के साथ साझेदारी की है ताकि कारोबार का विस्तार किया जा सके। साथ ही कर्मचारियों का आधार वित्त वर्ष 21 में दोगुना कर 1,000 कर दिया है और वित्त वर्ष 22 में इसे एक बार फिर दोगुना करेगी। जून में कंपनी 64 जगहों पर उपलब्ध होगी।