खाद्य उत्पादों की देश की सबसे बड़ी कंपनी ब्रिटानिया को बेंगलुरु के सिविल कोर्ट से कंपनी के सेवानिवृत कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान जारी रखने के अंतरिम आदेश के बाद पेंशनभोगी अपनी लड़ाई आगे बढ़ाने की तैयारियों में जुटे हैं।
ब्रिटानिया के पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (पीडब्ल्यूए) के मुताबिक, कंपनी के पेंशनभोगियों को हर 3 साल में होने वाली पेंशन बढ़ोतरी अप्रैल 2004 से नहीं मिली है। अप्रैल 2007 से होने वाली वृद्धि भी अब तक लंबित है। इसलिए आगामी 18 अप्रैल को करीब 270 पेंशनभोगियों द्वारा अदालत में अपील दायर करने की उम्मीद है।
पीडब्ल्यूए के प्रतिनिधि असित सरकार ने बताया, ”पेंशन मामले पर अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होने की संभावना है। इसके अलावा, न्यायालय के निर्देश पर 3 साल में होने वाली पेंशन वृद्धि के निलंबन का मामला भी दायर किया जाएगा।”
कोर्ट के फैसले पर ब्रिटानिया ने कहा, ”माननीय सिटी सिविल कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के पेंशन प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। पेंशन का यह प्रस्ताव कर्मचारियों द्वारा अपने सेवाकाल में किए गए योगदान पर आधारित है।
न्यायालय में लंबित मामले पर कोर्ट का अंतरिम फैसला कंपनी की राय कि पेंशन का भुगतान निश्चित योगदान पर आधारित हो, से ही मिलता-जुलता है।” उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु के सिविल कोर्ट ने 1 जनवरी 2009 को ब्रिटानिया को आदेश दिया था कि मामले का अंतिम फैसला आने तक कंपनी पेंशनभोगियों को पेंशन का भुगतान जारी रखे।
पेंशनभोगी ब्रिटानिया से जहां निश्चित लाभ पर आधारित पेंशन की मांग कर रहे हैं, वहीं कंपनी निश्चित योगदान पर आधारित भुगतान की बात कर रही है। गौरतलब है कि निश्चित लाभ योजना में लागत के बड़े हिस्से की जवाबदेही नियोक्ता पर होती है।
निवेश से मिलने वाला मुनाफा चाहे कम हो जाए या लागत बढ़ जाए, भरपाई नियोक्ता को ही करनी होती है। दूसरी ओर, निश्चित योगदान वाली योजना में योगदान करने वालों पर इसकी जिम्मेदारी होती है।