जीवन बीमा का एनबीपी घटा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:39 PM IST

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में बेहतर वृद्धि दर्ज करने के बाद 24 जीवन बीमा कंपनियों के नए कारोबार का प्रीमियम (एनबीपी) अक्टूबर महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 5 प्रतिशत कम हुआ है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का स्थिर प्रदर्शन है।
अक्टूबर महीने में उद्योग को 21,606 करोड़ रुपये एनबीपी मिला है, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 5.14 प्रतिशत कम है। निजी बीमा कंपनियों के एनबीपी में दो अंकों की 12 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है और यह 8,105.46 करोड़ रुपये रहा है, वहीं एलआईसी का एनबीपी 13 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 13,500.78 करोड़ रुपये रह गया है, जिसकी प्रमुख वजह व्यक्तिगत एकल प्रीमियम में गिरावट और समूह एकल प्रीमियम में स्थिरता है। एनबीपी किसी खास साल में नई पॉलिसी से आया प्रीमियम होता है।
बड़े निजी कारोबारियों में एचडीएपसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ और मैक्स लाइफ के अक्टूबर में एनबीपी में दो अंकों की वृद्धि हुई है। वहीं एसबीआई लाइफ का एनबीपी 6 प्रतिशत बढ़ा है। सालाना प्रीमियम समतुल्य (एपीई) के आधार पर निजी बीमा कंपनियों के कुल एपीई में 19 प्रतिशत और व्यक्तिगत एपीई में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बहरहाल मासिक आधार पर देखें तो निजी जीवन बीमा कंपनियों के कुल एपीई में गिरावट आई है। एपीई नियमित या चालू प्रीमियम और 10 प्रतिशत नए एकल प्रीमियम का कुल मूल्य होता है।
अब तक चालू वित्त वर्ष में (वित्त वर्ष 22 के 7 माह) जीवन बीमा कंपनियों का एनबीपी 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 4.12 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें निजी बीमाकर्ताओं ने 25 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है।
केयर रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘साल की शुरुआत से अक्टूबर तक पहले साल के प्रीमियम के मामले में एलआईसी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी (एलआईसी की हिस्सेदारी 64.2 प्रतिशत जबकि निजी कंपनियों की 35.8 प्रतिशत) बनी हुई है। निजी क्षेत्र लगातार बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रहा है और एलआईसी की तुलना में बहुत तेजी से इसका कारोबार बढ़ रहा है।’
एमके रिसर्च ने कहा, ‘कारोबार करने के तरीके में दशकों से बदलाव न करने के कारण एलआईसी तेजी से खुदरा जीवन बीमा कारोबार में अपनी हिस्सेदारी लगातार गंवाता नजर आ रहा है, खासकर ज्यादा राशि की बीमा के मामले में उसकी हिस्सेदारी कम हो रही है।’

First Published : November 9, 2021 | 11:44 PM IST