और मामले जाएंगे दिवालिया अदालत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 6:47 AM IST

एक ओर लेनदार कुछ और कंपनियों को अगले हफ्ते से दिवालिया अदालत ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, दूसरी ओर कई पुराने मामले समाधान की प्रतीक्षा में हैं और प्रक्रिया पूरी होने के मामले में किसी तरह की स्पष्टता नहीं है।
इनमें आरबीआई की पहली सूची में शामिल 40 कंपनियां हैं, जिनमें वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, भूषण पावर ऐंड स्टील और लवासा कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों आदि शामिल हैं। समाधान में देर की मुख्य वजहों में कानूनी मुकदमे और आरबीआई समेत विभिन्न सरकारी एजेंंसियों की तरफ से देर से स्पष्टीकरण और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से कानूनी मुकदमे शामिल हैं। एक बैंकर ने कहा, कई ऐसे मामले हैं जहां कोई समाधान नहीं निकला है जबकि लेनदारों की समिति सर्वोच्च बोलीदाता की घोषणा कर चुकी है। बैंक अगले हफ्ते से आईबीसी के तहत नए मामलों की सिफारिश शुरू करेंगे, लेकिन इस पर कोई निश्चितता नहीं है कि पहले के मामलों का निपटान कब होगा। कई सड़क, रियल एस्टेट और बिजली कंपनियां दिवालिया अदालत पहुंच जाएंगी जब आगामी हफ्ते में आरबीआई की तरफ से लगाई गई एक साल की पाबंदी हट जाएगी।
उन्होंने कहा, जेएसडब्ल्यू की तरफ से 19,700 करोड़ रुपये में भूषण स्टील का अधिग्रहण एक अच्छा उदाहरण है जो एक साल से समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है और मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। कंपनी ने 48,000 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक की है और जून 2017 से बैंकों को उस कंपनी से बकाया नहीं मिल रहा है। जेएसडब्ल्यू हालांकि पिछले मालिक की तरफ से किए गए आर्थिक अपराध से राहत मांग रही है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने इस पर आपत्ति जताई है और मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
एचसीसी की सहायक लवासा कॉरपोरेशन का समाधान भी लंबित है और लेनदार इसके लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 मार्च कर रहे हैं। कंपनी को साल 2018 में दिवालिया अदालत ले जाया गया था, जब वह कर्ज भुगतान में नाकाम रही। रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी सहायकों की किस्मत के बारे में भी अभी स्पष्टता नहीं है क्योंकि आरबीआई ने कहा है कि परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियां दिवालिया कंपनियों की बोली में भागीदारी नहीं कर सकती।
बैंकरों ने कहा कि वे एकमुश्त निपटान की योजना पर विचार कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो कि उनकी रकम सालों तक न फंसी रहे। आईबीसी की प्रक्रिया में बैंकों को अपने बकाया का औसतन 45 फीसदी मिल रहा है और एकमुश्त निपटान से बैंकों को निपटान प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय को हैदराबाद की एक कंपनी के मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था और आईबीसी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ी जब तेलंगाना उच्च न्यायालय ने समाधान प्रक्रिया पर रोक लगा दी। इससे पहले प्रवर्तकों ने अदालत का रुख कर लेनदारों की समिति से कहा कि वे ओसीटीएल के मामले में पूर्व प्रवर्तक की तरफ से एकमुश्त निपटान योजना के अलावा किसी अन्य प्रस्ताव पर विचार करे। यह मामला पिछले चार साल से लंबित है।
एक परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के प्रमुख ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय अभी भी कई मामलों पर पूर्व प्रवर्तकों, नियामकों व बोलीदाताओं की तरफ से उठाए गए मसलों पर स्पष्टीकरण दे रहा है। ऐसे में आईबीसी इस प्रक्रिया को समय पर पूरी करने के अपने मकसद को पूरा नहींं कर पा रहा है।

First Published : March 21, 2021 | 11:01 PM IST