वर्ष 2008 टाटा के लिए परेशानियों भरा रहा। पहले नैनो विवाद, फिर जगुआर-लैंडरोवर को पैसे की किल्लत, ताज पर आतंकवादी हमला और अब वियतनाम में प्रस्तावित स्टील संयंत्र परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में हो रही देरी।
इसके चलते टाटा समूह अपनी परियोजना पूरा नहीं कर पा रही है। दरअसल, टाटा स्टील की ओर से करीब 5 अरब डॉलर की लागत से वियतनाम में एक संयंत्र लगाने की योजना है।
लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी होने से टाटा को इस परियोजना के पूरा होने की तय अवधि को बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। उल्लेखनीय है कि 45 लाख टन सालाना क्षमता वाले संयंत्र को वर्ष 2010 में पूरा होना था।
टाटा स्टील के एक प्रवक्ता ने बताया कि संयंत्र में पहले चरण का काम वर्ष 2011 से पहले पूरा नहीं हो पाएगा। उनके मुताबिक, प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिससे इसकी अवधि बढ़ानी पड़ी।
वियतनाम के योजना विभाग ने टाटा को प्रस्तावित संयंत्र के लिए भूमि चिन्हित कर जरूरी मंजूरी दे दी थी। लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी हुई, क्योंकि एक ताइवानी कंपनी, जिसका वहां संयंत्र स्थित है, वह इमारत बनाने के लिए जमीन की मांग कर रही थी।
उल्लेखनीय है कि टाटा स्टील ने हा-तिन्ह प्रांत में स्टील कॉरपोरेशन और वियतनाम सीमेंट इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर स्टील संयंत्र लगाने का समझौता किया है, जिसके लिए कंपनी को 1,100 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है।
हाल ही में वियतनाम की यात्रा पर गए भारतीय अधिकारियों के एक दल ने हनोई के स्थानीय प्रशासन के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। टाटा स्टील के प्रवक्ता के मुताबिक, भारत और वियतनाम के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने में प्रस्तावित संयंत्र अहम भूमिका अदा कर सकता है।
ऐसे में दोनों देशों की सरकारें इस परियोजना के जल्द शुरू होने की कोशिश में जुटी है। प्रस्तावित परियोजना के लिए बने संयुक्त उपक्रम में टाटा स्टील की हिस्सेदारी 65 फीसदी होगी। जबकि इस संयंत्र के लिए कच्चे माल की आपूर्ति वियतनाम से ही की जाएगी।
बता दें कि जमीन अधिग्रहण में देरी की वजह से टाटा स्टील की झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित परियोजानाओं के पूरा होने में भी 2 से 3 साल की देरी होगी।
टाटा को दिया साल ने एक और झटका
इस साल टाटा की एक और परियोजना पर लगा ग्रहण
वियतनाम में प्रस्तावित स्टील संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण में रुकावट
कंपनी ने परियोजना की अवधि एक साल और बढ़ाई