बीएस बातचीत
भारत इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर कदम बढ़ रहा है ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) मानती है कि देश को तेजी से स्वचालित उद्योग के अगले अध्याय का हिस्सा बन जाना चाहिए। आईईए के कार्यकारी निदेशक फेथ बिरोल ने शाइन जैकब के साथ बातचीत में नवीकरणीय ऊर्जा में भारत के भविष्य और स्वच्छ ऊर्जा में रिलायंस की आक्रामक उपस्थिति सहित विभिन्न मुद्दों के बारे में चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:
भारत ने 450 गीगावॉट का महत्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्य तय किया है। इसके बारे में आपकी क्या राय है?
यदि आप पिछले वर्ष के दौरान दुनिया भर में स्थापित विद्युत संयंत्रों को देखें तो उनमें से 90 फीसदी अक्षय ऊर्जा यानी सौर और पवन बिजली के हैं। केवल शेष 10 फीसदी ही कोयला, प्राकृतिक गैस और तेल पर आधारित हैं। एशिया, यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका सहित दुनिया में हर जगह यही चलन है। इस बदलाव के दो कारण हैं- पहला है जलवायु परिवर्तन सहित पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं जिनका दुनिया सामाना कर रही है। इसके अलावा शहरों में प्रदूषण भी एक कारक है। कई सारी उपयोगिताएं और सरकारें अक्षय ऊर्जा का विकल्प अपना रही हैं क्योंकि यह सस्ता भी पड़ता है। जब मैं दुनिया भर में नजर घुमाता हूं तो पाता हूं कि अक्षय ऊर्जा को अपनाने के संदर्भ में सफल, कम सफल और बहुत अधिक सफल प्रयोग रहे हैं। मैं भारत को इस मामले में बहुत सफल देशों की श्रेणी में रखता हूं। भारत ने विशेष तौर पर सौर ऊर्जा को लेकर महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं, भारत बहुत अच्छा कर रहा है।
मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले महीने व्यापक अक्षय ऊर्जा योजनाओं की घोषणा की थी जिसमें 100 गीगावॉट की सौर क्षमता जोडऩे की बात भी कही गई थी। क्या भारत के लिए यह एक सकारात्मक रुझान है?
यह एक बड़ी बात है। यह न केवल भारत के लिए प्रेरणादायी साबित होगा बल्कि दुनिया के कई और देश भी इससे प्रेरणा लेंगे। मैं मानता हूं कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं और वैश्विक पूंजी शीघ्र ही धमाकेदार तरीके से एक दूसरे की जरूरत पूरी करने जा रहे हैं। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि भारत में सरकार विदेशी पूंजी हासिल करने के लिए अपनी तैयारी दिखा रही है और इस प्रक्रिया में सरकार भारत को एक आकर्षक पूंजी बाजार बना रही है। बिजली की बढ़ती मांग के साथ भारत में बाजार गतिशीलता मजबूत है। मैं मानता हूं कि आने वाले वर्षों में भारत की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में मजबूत तरीके से अंतराष्ट्रीय पूंजी का प्रवाह होगा।
उभरती दुनिया के लिए शुद्घ रूप से शून्य उत्सर्जन के लिए रोडमैप पर आपके विचार क्या हैं?
जलवायु परिवर्तन और शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को पाना हमारी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है कि दुनिया के एक हिस्से में होने वाले उत्सर्जन से हर कोई प्रभावित हो सकता है। इस दृष्टिकोण से देखें तो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ दुनिया की लड़ाई में सबसे महत्त्वपूर्ण बात उभरती दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा निवेशों को धन मुहैया कराना है। अमीर देशों को उभरती दुनिया को सहायता देने के लिए आर्थिक तार्किकता दिखानी चाहिए क्योंकि उभरतीय दुनिया में उत्सर्जन में कटौती की लागत प्रगति कर चुकी अर्थव्यवस्थाओं में मुकाबले केवल आधी है। आज जिस जलवायु परिवर्तन का हम सामना कर रहे हैं वह केवल आज के उत्सर्जन का ही नतीजा नहीं है बल्कि विगत 100 वर्षों में किए गए उत्सर्जन का भी परिणाम है। इसमें औद्योगीकृत देशों की हिस्सेदारी अधिक है। इसलिए यह एक नैतिक जिम्मेदारी है। इस संदर्भ में मैं मानता हूं कि भारत जलवायु परिवतर्न के लिए समाधान का हिस्सा बना रहेगा।
भारत का परंपरागत उत्पादन घट रहा है। जब आप इलेक्ट्रिक वाहनों या हाइड्रोजन का उपयोग एक स्रोत के तौर पर देखते हैं तो क्या व्यावहारिकता अब भी चिंता की बात नजर आती है?
अक्षय ऊर्जा निवेशों के मामले में भारत एक अग्रणी देश है। लेकिन उत्सर्जनों में कटौती के लिए केवल अक्षय ऊर्जा ही पर्याप्त नहीं है। हमें ऊर्जा क्षमता में सुधार करने सहित दूसरे उपाय करने की जरूरत है और हमें इलेक्ट्रिक कारों और हाइड्रोजन ऊर्जा की ओर देखने की जरूरत है।