देश में कोविड-19 संक्रमणों में अप्रत्याशित उछाल आने से सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को मिलने वाले कोविड संबंधी दावों में भी उछाल आई है। ऐसा कोराना संक्रमण की दूसरी लहर में अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में इजाफा होने के कारण हुआ है।
बीमाकर्ताओं को अप्रैल, 2021 तक 10 लाख से अधिक कोविड संबंधी दावे मिले हैं। सामान्य बीमा परिषद द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक मिले दावों की संख्या 10.14 लाख हो गई जिसकी रकम करीब 14,800 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से 7,956 रोड़ रुपये के 8,65,968 दावों का निपटान किया जा चुका है। इस प्रकार मिले दावों के लगभग 85 फीसदी का निपटान हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक मिले दावों का औसत आकार 1.46 लाख रुपये है लेकिन बीमाकर्ताओं की ओर से दावे के निपटान का औसत आकार 91,953 रुपये है।
पिछले साल जुलाई के अंत तक बीमाकर्ताओं को केवल 81,000 कोविड दावे मिले थे। यह संख्या एक महीने में दोगुना बढ़कर 1,60,000 हो गई और अक्टूबर के अंत तक यह 4,75,000 के आंकड़े को पार कर गई। नवंबर के मध्य तक आंकड़ा 5,76,000 के पार चली गई जो दिसंबर के आरंभ में 6,64,488 पर पहुंच गई जिसकी रकम 9,989.89 करोड़ रुपये थी।
दिसंबर से कोविड के दावों में वृद्घि की रफ्तार धीमी पड़ गई जो नए मामलों की संख्या में गिरावट के अनुरूप था। इस साल फरवरी के अंत तक सामान्य और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं को मिले दावों की संख्या 9 लाख के पार चली गई। 15 मार्च तक सामान्य और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं को कोविड संबंधी 9,38,640 मामले मिले जिनकी रकम 14,092 करोड़ रुपये थी। बीमाकर्ताओं ने 7,96,247 दावों का निपटान किया जिनकी रकम 7,418.62 करोड़ रुपये थी।
निजी क्षेत्र के एक वरिष्ठ बीमा कार्यकारी ने कहा, ‘हमें मिलने वाले दावों की संख्या में वृद्घि हो रही है और यह पूरे देश में हो रहा है लेकिन इनमें से अधिकांश दावे महाराष्ट्र से मिल रहे हैं। यह हमारे लिए चंता की बात है क्योंकि उत्पाद में लागत को नहीं जोड़ा गया था लेकिन हमारी नजर इस बात पर है कि टीकाकरण कितनी तेज गति से किया जाता है। हमें अपने घाटा अनुपात पर इन दावों का असर नजर आ रहा है। खुदरा पॉलिसियों और समूह स्वास्थ्य पॉलिसियों के लिए तुरंत प्रीमियम को नहीं बढ़ाया जा सकता है। दरें मामला दर मामला आधार पर संशोधित होती हैं।’
विशेषज्ञों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में सामान्य और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं को बहुत थोड़े से दावे मिले थे लेकिन दूसरी तिमाही में परिदृश्य बदल गया जब कोविड-19 के दावों में तेजी से उछाल आने लगी इनमें ज्यादातर कैशलेस थे। तीसरी तिमाही में दावों में अप्रत्याशित वृद्घि हुई क्योंकि बीमाकर्ता न केवल कैशलेस दावों का भुगतान कर रही थे बल्कि पिछले तिमाही से दावों की प्रतिपूर्ति भी कर रही थे। चौथी तिमाही में बीमाकर्ताओं को दावों के भुगतान में लगातार वृद्घि नजर आने लगी क्योंकि न केवल कोविड संबंधी बल्कि गैर-कोविड दावों की संख्या भी बड़े स्तर तक पहुंच गईं।
मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस में उत्पाद और दावों के जोखिम अंकन के निदेशक भावतोष मिश्रा ने कहा, ‘पिछले सात दिनों में कैशलेस दावों के रूप में मिलने वाले कोविड के दावे हमारे लिए दोगुने से अधिक हो गए हैं। यह फिलहाल बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। आरंभ में दूसरी लहर में कोविड के दावे मामलों की संख्या से मेल नहीं खाते थे। लेकिन अब यह जिस गति से बढ़ रहा है वह पहली लहर में नजर आए रुझान की ओर तेजी से बढ़ रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘स्थिति को और बिगाडऩे वाली बता यह है कि कुछ नेटवर्क प्रदाताओं ने कोविड मरीजों को कैशलेस दावे से इनकार करना शुरू कर दिया है। इसलिए बीमाकर्ता और अधिक भुगतान करना बंद कर रहे हैं क्योंकि प्रदाता और बीमाकर्ता के बीच सहमति वाला शुल्क प्रतिपूर्ति दावों पर लागू नहीं होता है। साथ ही, कोविड उपचार के लिए बड़े स्तर पर प्रोटोकॉल बने हुए हैं लेकिन अब हमें बहुत सारे दावों में बहुत उच्च एंटीबॉयोटिक्स का उपयोग नजर आ रहा है। समग्र औसत दावे के आकार में में लगातार कमी आ रही थी लेकिन दूसरी लहर में इसमें और कमी नहीं आई है और रुझान बाधित हो रहा है। कोविड दावों ने पहले ही लहर में हमारे घाटा अनुपात को नुकसान पहुंचाया है और सवाल उठता है कि हम कितने समय तक इसे झेल सकते हैं क्योंकि अब हम दूसरी लहर का भी सामना कर रहे हैं।’
पिछले कुछ दिनों से देश में रोजाना 1,00,000 से अधिक कोविड-19 संक्रमण के मामले आ रहे हैं। पहली लहर में कोविड-19 संक्रमण के मामले सितंबर में उच्च स्तर पर पहुंचे थे जिसके बाद नए मामलों में गिरावट आ रही थी लेकिन मार्च के मध्य से रुझान पलट गया और एक बार फिर से नए मामलों में तेजी से उछाल आने लगी है।