देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज ने अपने नवनियुक्त सहायक सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को बीपीओ कारोबार में स्थानांतरित करने का फैसला लिया है।
यह जानकारी कंपनी के सीईओ और प्रबंध निदेशक एस. गोपालकृष्णन ने दी है। चेन्नई में सीआईआई के एक कार्यक्रम में गोपालकृष्णन ने बिानेस स्टैंडर्ड से कहा, ”मौजूदा वक्त में हमने अपनी क्षमता सुधारने के लिए बिना काम के सुरक्षित बैठे कर्मचारियों का अधिकतम इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। वास्तव में यह दोनों पक्षों के लिए बढ़िया प्रस्ताव है।”
हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों की तनख्वाह में कोई कटौती नहीं की जाएगी। गोपालकृष्णन ने बताया कि अगले साल 16,000 नए कर्मचारियों को नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए बकायदा नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु, मैसूर और पुणे के करीब 150 से 200 सहायक सॉफटवेयर इंजीनियरों को सुरक्षित बैठने की बजाय 2 साल तक बीपीओ खंड में काम करने या कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया गया है। उल्लेखनीय है कि कंपनी में करीब 500 ऐसे सहायक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जिनके पास अभी कोई काम नहीं है।
इन्फोसिस के एक कर्मचारी के मुताबिक, ”हमें कोई दायित्व नहीं सौंपा गया है। अब हमें बीपीओ कारोबार में जाने या कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया गया है।” सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के कुल 3,500 सुरक्षित कर्मचारियों को बीपीओ कारोबार में लगाया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, मुख्यत: आईटी कारोबार में कार्यरत बीएससी डिग्रीधारियों के लिए यह निर्णय लिया गया है।
वैसे इसे किसी कर्मचारी पर नहीं थोपा जाएगा। इन्फोसिस के मानव संसाधन प्रमुख मोहनदास पई ने बताया, ”इन्फोसिस में कर्मचारियों का एक साझा समूह है। उनसे बीपीओ या आईटी किसी भी क्षेत्र में से कहीं भी काम करने को कहा जाता है।”
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”सुरक्षित बैठे कर्मचारियों को यूं ही बैठे रहने की बजाय हम उन्हें काम का प्रस्ताव दे रहे हैं।” विश्लेषक भी कंपनी के इस कदम को उचित बता रहे हैं।