अभी हाल फिलहाल की बात है जब कोका-कोला और पेप्सिको सिर्फ गर्मी में ही नजर आती थीं।
जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ती थी, जमीन तंदूर के समान गर्म हो जाती थी और लोगों के गले प्यास के मारे सूख जाया करते थे, तब इन दोनों सॉफ्ट ड्रिंक की प्रतिद्वंद्वी कंपनियां अपने-अपने नए अभियानों और नए उत्पादों के साथ शीतल पेय के बाजारों में उतारती थीं।
एक-दूसरे के साथ रस्साकशी का यह दौर काफी रोमांचक रहता। जैसे ही नजरें उठाते तो आसमान बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स से पटा रहता था। गर्मी खत्म होने की देर होती, इन कंपनियों के अभियान फिर से ठंडे पड़ जाते।
लेकिन शीतल पेय का माहौल अब उतना ठंडा नहीं है। कोका-कोला अपने प्रमुख ब्रांड थम्स अप (भारत कुछ ऐसे देशों में शुमार है, जहां कोक कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड नहीं है) के लिए नए अभियान के साथ सितंबर, 2008 में उतरी। अक्टूबर में जब पारा और कम हुआ, तब कंपनी ने स्प्राइट का ‘एक्सप्रेस पैक’ पेश किया।
कुछ ऐसा ही पेप्सिको के साथ रहा। कंपनी ने पिछले साल अक्टूबर में एक प्रीमियम एनर्जी ड्रिंक- सोबे पेश किया। कंपनी ने गर्मियों में बाजार भुनाने के लिए 7-अप का नींबू पानी वैरिएंट, ‘नींबूज’ फरवरी में तब पेश किया जब देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी पैर पसार रही थी।
आज से कुछ साल पहले तक साल-भर प्रचार वाजिब नहीं समझा जाता था, लेकिन आज यह आम है। पेप्सिको इंटरनैशनल के मुख्य कार्याधिकारी माइक व्हाइट ने पेप्सिको की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) 2008 की कमाई को लेकर इस फरवरी में यह पुष्टि की, ‘… पेय पदार्थ के उभरते हुए बाजार में चौथी तिमाही काफी दमदार रही, जिसमें चीन में हमारा कारोबार 20 प्रतिशत और भारत में 25 प्रतिशत बढ़ा।’
पेप्सिको इंडिया की कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग) पुनीता लाल मानती हैं, ‘गर्मियों के मौसम पर हमारी अत्यधिक निर्भरता कम हो रही है।’ कोका-कोला इंडिया के उपाध्यक्ष (मार्केटिंग) वेंकटेश कीनी यह भी कहते हैं, ‘हां, गर्मियां बिक्री के लिहाज से अहम समय है, लेकिन अब इससे काफी बड़ी मात्रा में कारोबार हो रहा हो, ऐसा नहीं है। हर ब्रांड के मद्देनजर साल-भर के लिए गतिविधियां शुरू होने से सर्दी के महीनों में हमारे कारोबार में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है।’
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग इसकी वजह है। इसके कारण दूसरे मौसम भी गर्म हो रहे हैं। कुछ कहते हैं सिर्फ उत्तर भारत में गर्मी इनकी बिक्री में अहम भूमिका निभाती है। मामला कुछ भी हो, भारतीय ग्राहकों को लेकर कंपनियों की टकराहट मुश्किल होती जा रही है।
उद्योग जगत के एक जानकार का कहना है, ‘हर साल भारतीय लगभग 120 अरब लीटर शीतल पेय पदार्थ की खपत करते हैं, जिसमें से सिर्फ 5 प्रतिशत ही पैकेज क्षेत्र में से है।’ पेप्सिको की योजना लगभग 2,500 करोड़ रुपये निवेश करने की है। जबकि कोका-कोला का बजट लगभग 1,250 करोड़ रुपये का है।
सिर्फ कोला ही नहीं…
हाल-फिलहाल तक देश में कोला ब्रांडों (थम्स-अप, कोका-कोला और पेप्सी) की बिक्री कार्बोनेटेड सॉफ्ट-ड्रिंक के बाजार में 7,500 करोड़ रुपये प्रति वर्ष थी।
तीन साल पहले तक, उनकी बाजार हिस्सेदारी 46 फीसदी तक पहुंच गई थी। दूसरे सभी उत्पादों- ऑरेंज, ऐपल, लाइम आदि की हिस्सेदारी 47 फीसदी थी। उद्योग अनुमानों के मुताबिक कोला की बाजार में हिस्सेदारी 38 प्रतिशत रह गई है, जबकि दूसरी श्रेणी के उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़कर 54 प्रतिशत हो गई है।
इसकी एक अहम वजह कुछ साल पहले खड़े हुए कोला में कीटनाशकों की मौजूदगी के विवाद रहा। तब दुनियाभर के ग्राहकों ने कोला से नजरें हटाकर सेहतमंद विकल्पों की और पलटी मारी।
सेहमंद विकल्पों की सफलता का प्रमाण यहीं से मिल जाता है कि हाल में कोका-कोला के लेमन ड्रिंक स्प्राइट ने शीतल पेय के बाजार में पेप्सिको के प्रमुख ब्रांड पेप्सी की जगह (दूसरा पायदान) ले ली। पेप्सिको ने भी इनकी मांग को देखते हुए नींबूज को बाजार में उतार दिया।
पुनीता लाल मानती हैं कि आज कंपनी सिर्फ कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक के मुकाबले तरल पेय पदार्थों की श्रेणी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इस श्रेणी से कंपनी की कुल कमाई का एक-तिहाई हिस्सा मिलता है, जो पहले लगभग 20 प्रतिशत था। लाल का कहना है कि कंपनी पैकेज्ड श्रेणी में अपनी सेवाएं देने पर काम कर रही है।
वह कहती हैं, ‘पिछले 15 साल या उतने वक्त से, इस श्रेणी में बड़े स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। ज्यादातर बेवरेज जैसे चाय, कॉफी, गन्ने का रस और हाल तक नींबू पानी बिना पैकिंग वाले उपलब्ध थे। अब इस बाजार पर हम ध्यान दे रहे हैं।’
लेकिन पेप्सिको की कार्यकारी उपाध्यक्ष (फ्लेवर्स) अल्पना टाइटस का कहना है कि स्वाद एक बड़ी श्रेणी है और यह अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। कई बार किसी नई श्रेणी के लिए लिमिटेड एडीशन उत्पाद ही पेश किया जाता है, जैसे कि एनर्जी स्पोट्र्स ड्रिंक।
कोका-कोला भी नए स्वादों की और बढ़ रही है, जबकि उसके मूल कोला ब्रांडों से कमाई अधिक हो रही है। कीनी का कहना है, ‘हमारा संतुलित पोर्टफोलियो है और हमारे सभी आठों ब्रांडों से लगभग 10 प्रतिशत या उससे कुछ ज्यादा कमाई होती है।’ हाल में, कोका-कोला ने देश में उसका पल्पी ऑरेंज ड्रिंक, मिनट मेड पेश किया था।
कंपनी ने अपने इन उत्पादों के लिए एक बड़ा विज्ञापन बजट रखा। कंपनी ने आमसूत्र वाली टैगलाइन के साथ माजा के विज्ञापन में कैटरीना कैफ का सहारा लिया। अब कोका-कोला अपनी अंतरराष्ट्रीय शृंखला में से गैर-कोला वाले कुछ उत्पाद भारतीय बाजार में पेश करने वाली है और साथ ही कंपनी स्थानीय बेवरेज को पैकिंग में उपलब्ध कराने का भी प्रयोग कर रही है। मिसाल के तौर पर आम पन्ना। कंपनी ने दक्षिण बाजार में ‘ऐपल’ स्वाद पेश किया।
पेप्सिको और कोका-कोला अब लोगों की सोच पर हमला कर रहे हैं। कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक के लिए ‘परिकल्पना’ काम करती है, जबकि दूसरी श्रेणी के लिए ‘उपयोगिता’ काम करती है। उदाहरण के लिए ‘परिकल्पना’ के रूप में पेप्सी ब्रांड को जिंदादिल दिखाने के लिए यंगिस्तान जैसा विज्ञापन पेश किया। इसमें दिखाया गया कि आप कुछ भी कर सकते हैं।
दूसरी तरफ ट्रॉपिकाना के विज्ञापन ने ग्राहकों को बताया, ‘यह 100 फीसदी जूस है।’ उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि टीवी पर कंपनियों की निर्भरता पिछले कुछ सालों में 95 प्रतिशत से घटकर 75 प्रतिशत हो गई है। अब विज्ञापन, मर्चेंडाइजिंग, मॉल-दुकानों पर प्रमोशन और उभरते हुए मीडिया जैसे रेडियो और इंटरनेट पर निवेश हो रहा है।
बढ़िया पैकेज, वाजिब दाम
कीनी का कहना है, ‘एक समय ऐसा था जब हम 200 मिलीलीटर की 5 रुपये वाली बोतल के साथ लोगों का दिल जीतना चाहते थे।’
आज बाजार में कोका-कोला की 200 मिलीलीटर वाली कांच की बोतल, जिसे लौटाना पड़ता है, 8 रुपये की है। 300 मिलीलीटर वाली बोतल की कीमत 10 रुपये है, जिसका उद्देश्य अधिक खर्च करने वालों को आकर्षित करना है। इसकी बिक्री ढाबों और ऐसी जगहों पर होती है, जहां लोग कीमत की चिंता नहीं करते।
हाल में कंपनी ने 600 मिलीलीटर वाला मोबाइल पैक बाजार में उतारा है। यह नया पैक ‘एक्सप्रेस पैक’ है और यह पर्यटन, मॉल आदि जगहों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इसके अलावा कंपनी ने पिछले साल 2 लीटर वाले पैक को बढ़ा बताने वाले ग्राहकों के लिए एक फ्रिज पैक भी पेश किया था।
पेप्सिको भी अपनी कीमतों को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। लाल का कहना है कि कंपनी ने कांच की बोतल की कीमत 8 रुपये और 10 रुपये के बीच में रखी जो वर्ष 2002 में भी इतनी थी। 600 मिलीलीटर मोबाइल पैक की कीमत 20 रुपये और सोबे की कीमत 75 रुपये है। पेप्सिको ने स्पोट्र्स ड्रिंक गैटोरेड 500 मिलीलीटर के पैक में उतारा। इसकी कीमत 35 रुपये थी।
प्रमोशन की दुनिया
कोका-कोला और पेप्सिको दोनों ही ने ऐसे पुराने चेहरों को दरवाजा दिखा दिया है। एक साल से पेप्सिको ने शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली से अलग दिशा थाम ली है और अपनी ‘यंगिस्तान’ ब्रिगेड- महेंद्र सिंह धोनी, रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोणे, इशांत शर्मा, रोहित शर्मा, श्रीशांत और वीरेंद्र सहवाग के साथ आगे बढ़ रही है।
कोका-कोला ने भी रानी मुखर्जी से मुंह मोड़ लिया है और फैंटा के लिए जेनेलिया डी’सूजा की ओर हाथ बढ़ा दिया है। ऑरेंज फ्लेवर श्रेणी में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए पेप्सिको ने ‘गजनी’ फिल्म की अभिनेत्री आसिन को चुना है।
हालांकि कंपनी ने कोक के ब्रांड ऐंबेसडर आमिर खान के साथ कोका-कोला के लिए अपने करार को आगे बढ़ाया है। ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय भी ब्रांड के साथ बने हुए हैं। थम्स-अप अभियान में अक्षय कुमार अपने स्टंट के साथ बने हुए हैं।
पेप्सिको इंडिया ने वर्ष 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के साथ आधिकारिक बेवरेज पार्टनर बने रहने के लिए पांच साल का करार किया था, जिसकी कीमत लगभग 62.5 करोड़ रुपये थी। लेकिन कुछ ही समय बाद कंपनी ने इस करार को रद्द कर दिया। इस बार कंपनी सिर्फ टीम-स्पॉन्सरशिप के ही मौके तलाश रही है।
हालांकि कंपनी अपने ब्रांड 7-अप के साथ चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आधिकारिक पार्टनर बन गई है, साथ ही वह मुंबई इंडियंस के लिए आधिकारिक साझेदार है। मुंबई इंडियंस के साथ साझेदारी से खिलाड़ियों की वर्दी पर पेप्सी की विशेष ब्रांडिंग के अधिकार हासिल हो जाएंगे। कंपनी ने एक नया टीवी विज्ञापन तैयार किया है, जिसमें धोनी, श्रीशांत, इशांत शर्मा और सहवाग को लिया गया है।
दूसरी तरफ कोका-कोला शाह रुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए स्प्राइट के साथ बतौर बेवरेज पार्टनर दिखाई देगी। इससे कंपनी को खिलाड़ियों के कपड़ों और उनके हेलमेट पर ब्रांड को दिखाने के अधिकार हासिल हुए हैं। कंपनी ने आईपीएल सीजन के अपने नए ‘कोका-कोला ओपन हैपीनेस’ अभियान के लिए गौतम गंभीर को ब्रांड ऐंबेसडर रखा है।