हालांकि, सरकार ने सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी (एलएलपी) फर्मों का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है।
लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेट (सीए) फर्मों, कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) फर्मों और कॉस्ट अकाउंटिंग फर्मों को अभी खुद को एलएलपी के रूप में पंजीकृत करने में देर लग सकती है।
तीनों नियामकों, इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) और इंस्टीटयूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटिंग ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) ने भी अभी तक एलएलपी को मान्यता नहीं दी है। इसके लिए उन्हें अपनी नियमों में फेर-बदल करने पड़ सकते हैं।
एक सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी फर्म, पार्टनरशिप फर्म और कंपनी के बीच की चीज होती है। इसकी स्थापना के लिए कम से कम दो साझेदारों होती है, लेकिन इसमें साझेदारों की तादाद पर कोई सीमा नहीं होती। दूसरी तरफ, एक पार्टनरशिप फर्म में ज्यादा से ज्यादा 20 साझेदार ही हो सकते हैं।
दो अप्रैल को दिल्ली स्थित लीगल कंसल्टेंट्स हांडू ऐंड हांडू ने खुद को एलएलपी के रूप में पंजीकृत करके ऐसा करने वाली पहली फर्म बन गई। आईसीएसआई के मुख्य कार्यकारी और सचिव एन. के. जैन के मुताबिक संस्था के नियमों में फेरबदल करने के बाद ही सीएस फर्म, एलएलपी के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। यही बात आईसीएआई और आईसीडब्ल्यूएआई के मामले में भी लागू होती है।
दरअसल, उन्हें भी अपने कायदे-कानूनों में फेरबदल करने होंगे। इसके बाद ही सीए और सीडब्ल्यूए फर्म खुद को एलएलपी के रूप में रजिस्ट्रर्ड करवा सकते हैं। इस वक्त इन फर्मों के पार्टनर वही लोग हो सकते हैं, जो उसी पेशे से ताल्लुक रखते हों।
मिसाल के तौर पर एक सीए फर्म में एक सीए ही पार्टनर बन सकता है। लेकिन एक एलएलपी में सीए, सीएस और यहां तक कि वकील भी मिलकर कई आयामों में काम करने वाले एक फर्म का निर्माण कर सकते हैं। इसके तहत लोगों की अलग-अलग पेशेवर जरूरतें, एक ही जगह पूरी हो सकती हैं।
जैन ने बताया कि आईसीएसआई ने मौजूदा नियमों में संशोधन का मौसदा सहमति के लिए कानून मंत्रालय के वैधानिक विभाग के पास पड़ा हुआ है। मंत्रालय की स्वीकृति हासिल करने के बाद ही इस संशोधन को लागू किया जा सकता है। इस वक्त करीब 23 हजार सीएस आईसीएसआई से जुड़े हुए हैं, जिनमें से 3,000 पेशेवर सीएस हैं।
साथ ही, देश में इस वक्त दो से ढाई हजार सीएस फर्म है। जैन के मुताबिक इनमें से ज्यादा पूर्ण स्वामित्व वाले फर्म हैं, जिनमें दो से चार साझेदार काम करते हैं। आईसीडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष कुनाल बनर्जी ने बताया कि, ‘हम एलएलपी के कानूनी के साथ-साथ सारे पहलूओं के बारे में अध्ययन कर रहे हैं।’
उन्हें भरोसा है कि इस बारे में जरूरी फेर-बदल दो महीने में पूरे कर लिए जाएंगे। उन्हें कहा कि, ‘हम इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं।’ इसी तरह आईसीएआई ने भी एलएलपी को मान्यता नहीं दी है। आईसीएआई के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि संस्था में एक समूह एलएलपी के सारे पहलूओं के बारे में विचार कर रहा है।
साथ ही, समूह से संस्था के सदस्यों से इस बाबत सुझाव भी मांगे है। उन्होंने बताया कि इस काम में महीनों लग सकते हैं। इस वक्त देश में 65 हजार सीए हैं और 40-45 हजार सीए फर्म। एलएलपी के तहत फर्म के सदस्यों का उत्तरदायित्व उनके हिस्से तक सीमित रहता है। साथ ही, किसी पार्टनर को दूसरे की गलतियों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।