विदेशी बाजार से मिला सहारा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 11:46 PM IST

डाबर, मैरिको और ब्रिटानिया जैसी भारतीय एफएमसीजी कंपनियों की विदेशी विकास दर, घरेलू विकास दर से अधिक हो गई है।
जहां इन कंपनियों के उत्पादों की घरेलू बिक्री में 15 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है, वहीं विदेशों में बिक्री विकास दर 40 से 44 फीसदी है। मिसाल के तौर पर डाबर के विदेशी ऑपरेशन का हिस्सा 31 दिसंबर को समाप्त हुए नौ महीने की अवधि में समेकित आय का 18 फीसदी रहा।
डाबर इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक राजन वर्मा कहते हैं, ‘2007-08 में विदेशी परिचालन में 16 फीसदी का इजाफा हुआ। कंपनी के विकास में अंतरराष्ट्रीय कारोबार का योगदान काफी अधिक रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष के शुरूआती नौ महीने में गल्फ को-ऑपरेशन परिषद (जीसीसी) और दक्षिण अफ्रीकी बाजारों में कंपनी ने 43.3 फीसदी का इजाफा दर्ज किया है।’
वर्मा के मुताबिक अगर अकेले जीसीसी क्षेत्र की बात की जाए, तो कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष के शुरूआती नौ महीने में 47 फीसदी का विकास दर्ज किया है। हेयर क्रीम, टूथपेस्ट, हमाम जैथ और ऑलिव ऑयल की बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में वाटिका ऑलिव ऑयल ने काफी तेजी से विकास किया है। जबकि डाबर का एफएमसीजी कारोबार में 13 फीसदी की विकास दर दर्ज की गई।
डाबर ने इस साल अल्जीरिया, लेबनान, तुर्की और चीन जैसे नए बाजार में भी अपना विस्तार किया है। डाबर के उत्पाद आज 50 देशों में बिक रहे हैं, जिसमें मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका शामिल है।
मैरिको, आईबीजी के सीईओ विजय सुब्रमण्यम के मुताबिक पिछले तीन साल में कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में सालाना आधार पर 40 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। इसमें उत्पाद और अधिग्रहण से जुड़ी विकास को भी शामिल किया गया है। अभी मैरिको इंटरनेशनल बिजनेस ग्रुप (आईबीजी) की कुल टर्नओवर में अंतरर्राष्ट्रीय कारोबार का हिस्सा 18 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2009 में आईबीजी अपने कारोबार में 400 करोड़ रुपये इजाफे की उम्मीद करती है। मैरिको बांग्लादेश, मध्य पूर्व, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के बाजारों में अच्छा कारोबार कर रही है। इसके अलावा मैरिको आईबीजी का निर्यात दुनियाभर के 20 से अधिक देशों में किया जाता है।
ब्रिटानिया के प्रवक्ता के मुताबिक कंपनी की विदेश में होने वाली विकास दर ने घरेलू विकास दर को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने बिस्कुट बेचती है, जबकि मध्य पूर्व में चॉकलेट भी बेचती है। तेजी से उभरते हुए मध्य पूर्व के बाजार में काबिज होने के लिए कंपनी ने खीमजी रामदास ग्रुप से दो बेकरी उत्पाद कंपनियां चलाने के लिए समझौता भी किया है। हालांकि आईटीसी और गोदरेज कंज्यूमर की विदेशों में उपस्थिति उतनी अधिक नहीं है।

First Published : April 8, 2009 | 9:56 PM IST