कमोडिटी और अन्य कच्चे माल की कीमतों में गिरावट के बावजूद एफएमसीजी कंपनियों का मुनाफा सिकुड़ता जा रहा है। दरअसल, मंदी के चलते उनकी बिक्री जोर नहीं पकड़ पा रही है।
ऐसे में एफएमसीजी कंपनियां ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तमाम तरह के ऑफर दे रही हैं। साथ ही उपभोक्ताओं पर अध्ययन भी करा रही हैं, ताकि बिक्री बढ़ाने के लिए नई रणनीति बनाई जा सके।
फिलहाल एफएमसीजी कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए प्रमोशनल ऑफर देकर ग्राहकों को दुकानों तक खींचने की कोशिश कर रही हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि कमोडिटी की कीमतों में आई गिरावट से एफएमसीजी कंपनियों को बहुत ज्यादा फायदा होता नहीं दिख रहा है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों ने कच्चे माल की खरीदारी उस समय में की है, जब कमोडिटी की कीमतें आसमान छू रही थीं। साथ ही इन कंपनियों की बिक्री घटने से उनके पास स्टॉक भी काफी बढ़ गया है। हालांकि कुछ कंपनियों के मुनाफे पर कमोडिटी की घटी कीमतों का असर दिख सकता है, लेकिन मांग पक्ष अब भी कमजोर बना हुआ है।
ऐंजल ब्रोकिंग के विश्लेषक आनंद शाह का कहना है कि मंदी की वजह से एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा है, लेकिन आने वाले समय में उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। क्योंकि कमोडिटी की कीमतें जहां कम हुई हैं, वहीं कंपनियों ने लागत में भी कटौती की है।
मैरिको के सीईओ (कंज्यूमर प्रोडक्ट) एस. गुप्ता का कहना है कि पिछले साल महंगाई की वजह से उपभोक्ताओं ने खरीदारी में कटौती की है। लेकिन अब स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्होंने बताया कि कंपनी कुछ उत्पादों की कीमतों में कटौती की है। इसके साथ ही कंपनी ब्रांड बिल्डिंग के लिए निवेश की योजना भी बना रही है। इसके साथ ही मैरिको ग्रामीण उपभोक्ताओं पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, क्योंकि मंदी का इन इलाकों में बहुत कम असर पड़ा है।
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और अध्यक्ष एच.के. प्रेस का कहना है कि मौजूदा हालात में उपभोक्ता कंज्यूमर डयूरेबल्स, मकान आदि की खरीदारी से बच रहे हैं, जिसका फायदा एफएमसीजी कंपनियों को मिलना तय है। कंपनी को उम्मीद है कि इस दौर में उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी। कंपनी भी अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रमोशन ऑफर दे रही हैं।
इमामी के निदेशक आदित्य अग्रवाल का कहना है कि मंदी के इस दौर में ग्राहकों ने अपने बजट में कटौती की है और वे बहुत सोच-समझकर ही खरीदारी कर रहे हैं। यही वजह है कि एफएमसीजी की मांग पर असर पड़ा है।