देश की प्रमुख फार्मास्युटिकल कपंनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड धीरे-धीरे छोटे-छोटे वितरकों वाले कई बाजारों से पलायन करने की तैयारी कर रही है।
ये वे बाजार हैं, जिनका योगदान कंपनी के कुल कारोबार में 1 प्रतिशत से भी कम है। कंपनी कुछ खास बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने वैश्विक जेनेरिक अंतिम खुराकों की रणनीति पर दोबारा विचार कर रही है।
अमेरिका, भारत, रूस और सोवियत संघ से अलग हुए देशों के समूह (सीआईएस) और जर्मनी में, जहां पहले ही कंपनी के परिचालन कार्यों से उसे कुल वैश्विक जेनेरिक राजस्व का लगभग 90 फीसदी हासिल होता है (दिसंबर, 2008 में समाप्त हुई 9 महीने की अवधि के लिए)।
इनके अलावा कंपनी का मानना है कि कंपनी उन 10 से 15 बाजारों में भी अपना परिचालन कार्य जारी रखेगी, जहां उसकी अंतिम खुराकों की बिक्री में अहम रफ्तार से इजाफा हो रहा है। कंपनी का यह कदम वैश्विक जेनेरिक कारोबार में अहम और नए लक्ष्य को दिखाता है, जिसके तहत कंपनी अपने परिचालन कार्य को अलग-अलग देशों से इकट्ठा करेगी और उन मुख्य बाजारों में कंपनी अपनी मौजूदगी को बढ़ाएगी, जहां पहले से ही उसका कारोबार अच्छा चलता है।
कंपनी का मानना है कि इसके परिणामस्वरूप एक तरफ जहां कंपनी के परिचालन कार्यों में दिखाई देने वाली जटिलता में कमी आएगी वहीं दूसरी तरफ ग्राहक सेवा और बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
डॉ. रेड्डीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी सतीश रेड्डी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘हमारा इरादा इस रणनीतिक तरजीह के साथ तेजी से हमारे मुख्य बाजारों में आगे बढ़ना है। मुख्य बाजारों को चुनने से हमें अपने संस्थान के भीतर ही संसाधनों को सही जगह इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। हालांकि कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आकर्षित करने वाले मौकों की तलाश करती रहेगी।’