हाल में भारतीय नागरिकों के डेटा से संबंधित कई कॉरपोरेट डेटा लीक के मामले सामने आए हैं। इसी क्रम में पिज्जा शृंखला डोमिनोज के लाखों ग्राहकों के ऑनलाइन रिकॉर्ड के कथित तौर पर ऑनलाइन लीक होने का मामला सामने आया है।
इजराइल के साइबर क्राइम इंटेलिजेंस फर्म हडसन रॉक के सह-संस्थपक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एलन गैल के ट्वीट के अनुसार करीब 13 टेराबाइट डेटा के लीक होने की आशंका है। उन्होंने रविवार को ट्वीट किया था कि इस डेटा में करीब 18 करोड़ ऑर्डर की जानकारियां शामिल थीं। ऑर्डर की इन जानकारियों में ग्राहकों के फोन नंबर, ई-मेल, पते, भुगतान संबंधी जानकारी आदि शामिल थीं।
गैल ने कहा कि यह डेटा डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध था और इसके लिए थ्रेट एक्टर इस डेटा के लिए 5,50,000 डॉलर मांग रहा था। उन्होंने कहा कि थ्रेट एक्टर ने एक सर्च पोर्टल तैयार करने की भी योजना बनाई थी ताकि वह इस डेट को खोज सके।
डोमिनोज इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘हाल में जुबिलैंड फूडवक्र्स में सूचना सुरक्षा से संबंधित एक मामला सामने आया था। लेकिन किसी भी व्यक्ति की वित्तीय जानकारी से संबंधित किसी भी डेटा को ऐक्सेस नहीं किया गया है और इस घटन का परिचालन अथवा कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। हम अपनी नीति के तहत ग्राहकों की वित्तीय जानकारियों अथवा क्रेडिट कार्ड संबंधी जाकारियों को एकत्रित नहीं करते हैं। इसलिए ऐसी किसी भी जानकारी से कोई समझौता नहीं किया गया है। हमारे विशेषज्ञों की टीम मामले की जांच कर रही है और हमने इस घटना को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की है।’
जुबिलैंट फूडवक्र्स डोमिनोज इंडिया की मूल कंपनी है। पिछले महीने भुगतान फर्म मोबिक्विक में बड़े डेटा लीक के बारे में सबसे पहले ग्राहकों को सचेत करने साइबर सिक्योरिटी अनुसंधानकर्ता राजशेखर राजहरिया ने कहा कि उन्होंने मार्च में डोमिनोज के डेटा लीक के बारे में सरकार की साइबर सुरक्षा इकाई कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-आईएन) को सतर्क किया था।
राजहरिया ने सोमवार को अपने एक ट्वीट में कहा, ‘एक बार फिर डेटा लीक का बड़ा मामला! डोमिनोज इंडिया के 18 करोड़ ऑर्डर डिटेल सहित 13 टीबी डेटा डोमिनोजइंडिया सर्वर से कथित तौर पर लीक हुआ। डेटा में मोबाइल, ईमेल, नाम, घरे के पता, भुगतान का प्रकार और सोशल लॉगिन टोकन शामिल हैं। ऐसा लगता है कि उसमें वित्तीय डेटा शामिल नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा कि डोमिनोज डेटा को पहले उसी हैकर के कब्जे में होने का दावा किया गया था जिसने मोबिक्विक के डेटा को ऐक्सेस किया था।
डोमिनोज में कथित डेटा चोरी का यह मामला ऑनलाइन डेटा लीक होने पर भारतीयों के लिए उपलब्ध कानूनी एवं परिचालन संबंधी उपायों की कमी को एक बार फिर उजागर करता है।
भारत में उपयोगकर्ताओं के डेटा लीक होने के मामलों अथवा उससे संबंधित दंडात्मक कार्रवाई के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। डेटा चोरी के ऐसे मामलों से निपटने वाला प्रस्तावित व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक 2019 से ही लोकसभा में लंबित है।