सस्ता पाम तेल वनस्पति इकाइयों के लिए वरदान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 10:50 PM IST

लघु एवं मझोले उद्योग के वनस्पति निर्माता अपने कारोबार में उछाल देख रहे हैं। इनके कारोबार में इजाफा होने के पीछे दो प्रमुख कारकों की अहम भूमिका बताई जा रही है।
इन कारकों में कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में गिरावट आना और घरेलू बाजार में वनस्पति की बिक्री में हुई बढ़ोत्तरी है। क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) की कीमत में गिरावट इन निर्माताओं के लिए मददगार साबित हुई है।
प्रमुख क्षेत्रीय ब्रांड ‘झूला’ के एस एन झुनझुनवाला कहते हैं कि पिछले तीन महीनों के दौरान 25 किलोग्राम वाले टिन की कीमत लगभग एक-तिहाई तक कम कर दी गई है जिससे वनस्पति की बिक्री में इजाफा हो रहा है।
वनस्पति निर्माताओं की व्यापार संस्था के एक प्रमुख अधिकारी ने कहा, ‘हमारे ग्राहकों में ज्यादातर बिस्कुट बनाने वाली कंपनियां या फूड आउटलेट शामिल हैं। कीमत सस्ती होने की वजह से ये कंपनियां हमारे वनस्पति की अतिरिक्त खरीदारी में दिलचस्पी दिखा  रही हैं।’
बाजार के बड़े हिस्से पर झूला जैसे बड़े क्षेत्रीय ब्रांडों का दबदबा कायम है। इसके अलावा कुछ राष्ट्रीय ब्रांड भी बाजार में मौजूद हैं। अधिकारी ने कहा कि झुनझुनवाला जैसे निर्माता पाम ऑयल की कीमतों में गिरावट की वजह से लागत बचत का फायदा ग्राहकों को भी उपलब्ध करा रहे हैं।
हालांकि कई खाद्य तेल निर्माता कच्चे माल की कीमतों में गिरावट का फायदा तो उठा रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने उत्पाद की कीमतों में बेहद कम कटौती की है। झुनझुनवाला कहते हैं कि उनके ज्यादातर ग्राहक श्रेष्ठ गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत जैसे कारकों की वजह से उनके ब्रांड को लेकर प्रतिबद्ध बने हुए हैं। ये ग्राहक काफी लंबे समय से उनके साथ जुड़े हुए हैं।
पाम ऑयल वनस्पति निर्माताओं के लिए प्रमुख एवं पसंदीदा कच्चा माल है, क्योंकि इस तेल को वनस्पति में तब्दील किए जाते समय कम हाइड्रोजेनेशन की जरूरत होती है और यह वनस्पति प्रदूषित हुए बगैर लंबे समय तक बना रहता है। हाइड्रोजेनेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी खाद्य तेल को वनस्पति में परिवर्तित करने के लिए हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल किया जाता है।
पाम ऑयल की कीमतें मार्च 2008 और फरवरी 2009 के बीच घट कर लगभग आधी रह गईं हैं। मलेशिया और इंडोनेशिया समेत कई देशों में अच्छी पैदावार होने की वजह से दूसरी छमाही में पाम ऑयल की कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है। मलेशिया और इंडोनेशिया का विश्व के कुल पाम ऑयल उत्पादन में 90 फीसदी का योगदान है।
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अनुमानित रूप से बंपर उत्पादन होने की वजह से आरबीडी ओलीन गिर कर 500 डॉलर एफओबी हो जाने की संभावना है। हालांकि खाद्य तेलों की बिक्री में भी इजाफा होगा, क्योंकि खाद्य तेल की प्रति व्यक्ति खपत पिछले साल के 11.40 किलोग्राम की तुलना में इस साल 11.64 किलोग्राम रहेगी।
जहां भारतीय वनस्पति इकाइयां अच्छी स्थिति में हैं वहीं कई अन्य बाजारों में प्रति व्यक्ति खपत कम हो जाने की वजह से वनस्पति की बिक्री में गिरावट आई है। आशंका जर्ताई जा रही है कि वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से पाम ऑयल गिर कर 380 डॉलर प्रति टन पर आ सकता है।

First Published : April 4, 2009 | 4:29 PM IST