3जी पर अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ खड़े हो गए सेल्युलर ऑपरेटर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 08, 2022 | 9:42 AM IST

जीएसम ऑपरेटरों की संस्था सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने दूरसंचार नियामक की ओर से 3जी स्पेक्ट्रम पर 2 फीसदी के अतिरिक्त शुल्क की सिफारिश का विरोध किया है और इसे ‘प्रतिकूल कदम’ करार दिया है।


सीओएआई ने यह भी कहा है कि इससे सेवा प्रदाताओं पर सिर्फ वित्तीय बोझ बढ़ेगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा था कि 3जी स्पेक्ट्रम इस्तेमाल की पूरी अवधि के लिए 2 फीसदी का सालाना प्रशासित शुल्क लगाया जाना चाहिए।

9 दिसंबर, 2008 को अपनी सिफारिश में दूरसंचार नियामक ने कहा था कि यह वार्षिक सकल राजस्व (एजीआर) के 3-8 फीसदी के स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क से अतिरिक्त होना चाहिए।

सीओएआई ने अपने एक पत्र में कहा है, ‘ट्राई की ओर से अतिरिक्त शुल्क की इस सिफारिश को पूरे उद्योग और शेयरधारकों द्वारा एक प्रतिकूल कदम करार दिया गया है और इसे 3जी के लिए भारतीय और विदेशी बोलीदाताओं दोनों के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है।’

सीओएआई ने यह भी कहा है कि नियामक द्वारा ऐसे करों के लिए जो तर्क या कारण बताए गए हैं, वे स्वयं विरोधाभासी हैं। सीओएआई की ओर से यह पत्र आज डीओटी के सचिव एवं दूरसंचार आयोग के चेयरमैन सिद्धार्थ बेहुरा के नाम लिखा गया है।

जब इस बारे में सीओएआई के महा निदेशक टीवी रामचंद्रन से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, ‘डीओटी के सचिव को इस मामले का प्रतिनिधित्व करने को कहा गया है और उन्हें सलाह दी गई है कि इस मामले को दूरसंचार आयोग के समक्ष उठाया जाना चाहिए।’

सीओएआई ने अपने पत्र में कहा है, ‘अतिरिक्त शुल्क थोपे जाने की सिफारिश पूरी तरह से अवैध, गलत और अनुचित है।’ ट्राई ने कहा था कि स्लैब सिस्टम के तौर पर समान दर पर प्रशासनिक शुल्क लगाया जाना सामान्य होगा और इसका क्रियान्वयन भी आसान होगा।

जीएसएम सेवा प्रदाताओं की संस्था का कहना है कि ऐसे करों से सेवा के खर्च में इजाफा होगा। यह बोझ ऐसे वक्त बढ़ जाएगा जब क्षेत्र अपने राजस्व का लगभग 30 फीसदी शुल्कों के रूप में पहले से ही चुका रहा है।

First Published : December 16, 2008 | 10:38 PM IST