वायरलेस इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को अब इंटरनेट की धीमी गति की शिकायत नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए कि सीडीएमए ऑपरेटर 3.1 मेगाबाइट प्रति सेकंड (एमबीपीएस) की इंटरनेट सेवा लॉन्च कर रहे हैं।
यह गति मौजूदा वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन से 20 गुनी और सामान्य ब्रॉडबैंड कनेक्शन से 10 गुनी ज्यादा है। टाटा टेलीसर्विसेज ने ‘फोटॉन प्लस’ सेवा लॉन्च की है। इसमें एक प्लग और प्ले डिवाइस दिया जा रहा है और इंटरनेट की गति 3.1 एमबीपीएस है।
टाटा टेलीसर्विसेज का दावा है कि मौजूदा वायरलेस इंटरनेट टेक्नोलॉजी की तुलना में यह गति 20 गुनी ज्यादा है। कंपनी ने यह भी बताया कि उसकी एक अन्य सेवा पावर लॉन्चर, जो ईथरनेट (वायर) आधारित ब्रॉडबैंड सेवा है, की गति 100 एमबीपीएस है।
टाटा टेलीसर्विसेज के महाराष्ट्र सर्किल के प्रबंध निदेशक मुकुंद गोविंद राजन ने बताया, ‘इंटरनेट उपभोग के मामले में देश में अभी विस्फोट जैसे हालात हैं। न केवल बैंडविथ में वृद्धि हो रही है बल्कि इसके इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। यह सेवा लॉन्च होने से तेज और बाधारहित इंटरनेट सेवा मुहैया कराई जा सकेगी।’
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश में 1.3 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन हैं। इनमें से 56.5 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। टाटा के अलावा एक अन्य सीडीएमए कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस ने उच्चगति के ब्रॉडबैंड कनेक्शन रिलायंस नेटकनेक्ट ब्रॉडबैंड प्लस की शुरुआत की है। इसकी डाउनलिंक गति 3.1 एमबीपीएस और अपलिंक गति 1.8 एमबीपीएस है।
आरकॉम का तो दावा है कि उसकी यह सेवा देश में उपलब्ध सेवाओं में सबसे तेज है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर एसोसियशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजेश छारिया कहते हैं, ‘यह सही है कि ये कंपनियां 3.1 एमबीपीएस की गति मुहैया करा रही हैं। हालांकि एक्सेस और इंटरनेशनल बैंडविड्थ के बारे में कहना थोड़ा मुश्किल है। यदि कंपनियों के दावे को सच मान लें तो निश्चित तौर पर उद्योग के लिए यह बड़ी उपलब्धि है।’
ब्रॉडबैंड कनेक्शन की मौजूदा परिभाषा के मुताबिक, ईथरनेट कनेक्शन पर न्यूनतम 256 केबीपीएस और वायरलेस पर 144 केबीपीएस की गति को ब्रॉडबैंड कनेक्शन माना जाता है।