खरीदार बुलाने की चुनौती

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 08, 2022 | 10:45 AM IST

मंदी का जो हौवा बहुत समय से सबके जेहन में था, वह अब असलियत का जामा पहन चुका है यानी वाकई मंदी आ गई है।


रिटेल क्षेत्र पर इसका असर नहीं पड़ने का सवाल ही नहीं। दरअसल लोगों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका असर रिटेलरों पर भी होगा। यह बात अलग है कि महीने के राशन में लोग ज्यादा कटौती नहीं कर सकते, इसलिए उनकी बिक्री तो कमोबेश वैसी ही रहेगी।

लेकिन फैशन से जुड़ी वस्तुओं, परिधान और कंप्यूटर जैसे उपकरणों की बिक्री तेजी से नीचे जाएगी। रिटेल के सामने केवल यही चुनौती नहीं होगी, उनके लिए नकदी का प्रवाह कायम रखना भी आसान बात नहीं होगी।

दरअसल पिछले साल तक विस्तार या दूसरी गतिविधियों के लिए कर्ज लेकर रकम की जुगाड़ करना रिटेलरों के लिए काफी आसान था, लेकिन अब बैंक सख्त हो गए हैं,

इसलिए रकम जुटाना मुश्किल होगा। जाहिर सी बात है कि इसका असर विस्तार और निवेश पर दिखेगा। मेरे खयाल से अगले साल तो रिटेल क्षेत्र में विस्तार तो न के बराबर ही दिखेगा।

एक खास बात यह है कि 2009 में कारोबार में इजाफा बहुत कम होगा। इसकी वजह से कई ऐसे स्टोरों पर हम ताले पड़ते देखेंगे, जो अब तक घिसट-घिसटकर चल रहे हैं। ग्राहक खर्च के बजाय संकट के दौर में बचत पर जोर दे रहे हैं, इसलिए रिटेल स्टोरों की कमाई कम होना लाजिमी है।

वैसे, रिटेलरों के लिए गांवों से उम्मीद की किरण दिख रही है। खेती में मंदी नहीं है और गांवो में मांग भी कम नहीं हुई है। इसलिए कस्बों या छोटे शहरों तक पहुंच वाले रिटेलरों को राहत मिल सकती है।

जहां तक छंटनी का सवाल है, तो लागत का दबाव तो सभी पर है और रिटेल क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन बिना कर्मचारियों के बिक्री तो संभव नहीं है,

इसलिए छंटनी का बड़ा दौर यहां देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन स्टोर ही बंद हुए, तो लोग बेरोजगार जरूर होंगे। हां, नई नियुक्तियां होना मुश्किल है और वेतन में इजाफे के बारे में नहीं सोचने में ही समझदारी है।

 (बातचीत : ऋषभ कृष्ण)

लोग अब बचत पर जोर दे रहे हैं।?इसलिए बिक्री करना होगा टेढ़ी खीर 

अंबीक खेमका
समूह अध्यक्ष, विशाल रिटेल

विस्तार योजनाओं पर लग गया ग्रहण।आगे की राह पथरीली

मोहित खट्टर

अध्यक्ष, सुभिक्षा ट्रेडिंग सर्विसेज

First Published : December 22, 2008 | 11:21 PM IST