छोटे पैकेटों की वजह से पैदा हुआ बड़ा संकट

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 11:56 PM IST

ऐसा माना जाता है कि जो चीज जितनी होगी, उससे लोगों का लगाव उतना ज्यादा होगा। वैसे, ऐसा हर बार नहीं होता।
मिसाल के तौर पर एफएमसीजी कंपनियों को ही ले लीजिए। इनकी कमाई के सबसे बड़े स्रोत सस्ते उत्पाद हैं। लेकिन उनके उत्पादों के छोटे पैकेटों को बिक्री को देखें, तो उनके सामने भारी संकट हैं।
वैसे, साबुन की कीमतों में कंपनियां 17 फीसदी और डिटर्जेंटों की कीमतों में 24 फीसदी तक का इजाफा कर चुकी हैं, लेकिन इनके छोटे पैकेटों की कीमतों में अब तक कोई इजाफा नहीं हुआ है। 
निलसन के ताजा आंकड़ों की मानें मार्च, 2008 से लेकर फरवरी, 2009 के बीच के नौ महीनों के दौरान 10 रुपये से कम में मिलने वाले साबुनों और डिटर्जेंटों की कीमत में असल में गिरावट देखने को मिली है। यह ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों के लिए परेशानी का सबब साबित हो सकते हैं।
असल में, साबुनों की कुल बिक्री का 25 फीसदी और डिटर्जेंटों की कुल बिक्री का 60 फीसदी इसी सेक्टर से आता है। वैसे, डिटर्जेंटों की कुल बिक्री में 3.6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन कम कीमतों वाले डिटर्जेंटों की बिक्री में तो उससे भी ज्यादा यानी पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
साबुन के मामले में कुल बिक्री में वैसे तो दो फीसदी की मामूली इजाफा दर्ज किया गया है। लेकिन छोटे पैक वाले साबुनों की बिक्री तो पूरे 8.5 फीसदी गिरी है। तस्वीर और भी बदतर हो सकती थी, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बढ़ती बिक्री ने इसे संभाल लिया है।
छोटे पैकेटों में डिटर्जेंट की बिक्री जहां शहरी इलाकों में 10 फीसदी तक गिरी है, वहीं ग्रामीण इलाकों में इनकी बिक्री में दो फीसदी का इजाफा हुआ है। कुछ ऐसा ही मामला साबुनों के साथ भी है। शहरी इलाकों में साबुनों के छोटे और सस्ते पैकेटों की बिक्री में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह गिरावट सात फीसदी तक सीमित रही।
साथ ही, यह पहली बार है, जब ग्रामीण इलाकों की बिक्री शहरी इलाकों में हुई बिक्री से ज्यादा रही। इन 11 महीनों में एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री का 53 फीसदी हिस्सा ग्रामीण इलाकों से आया। विश्लेषकों के मुताबिक यह जादू है अच्छे मानसून, कर्ज माफी और आर्थिक मंदी से गांवों के अनछुए रहने का।
छोटे पैकेटों की घटती बिक्री की सबसे बड़ी वजह रही कि कंपनियों ने दाम में इजाफे से बचने के लिए इनमें उत्पाद की मात्रा को कम कर दिया। पिछले साल कच्चे माल की चढ़ती कीमतों की वजह से हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारिको और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने किफायत का ध्यान रखने वाले बाजार में बिकने वाले उत्पादों के पैकेटों में मात्रा को कम कर दिया था।
गोदरेज के अध्यक्ष एच. के. प्रेस ने बताया कि, ‘पिछले साल कच्चे माल की चढ़ती कीमतों की वजह से हमें या तो कीमतों में इजाफा करना था या मात्रा में कटौती।’

First Published : April 10, 2009 | 6:16 PM IST