अब भारतीय आईटी कंपनियां चौथी तिमाही और सालाना नतीजों को तैयार करने में जुटी गई हैं। लेकिन उनके लिए बुरी खबरों का आना बंद नहीं हो रहा है।
विश्लेषकों की मानें तो दुनिया भर में आईटी पर होने वाला खर्चे में तीन फीसदी तक की गिरावट दर्ज हो सकती है। विश्लेषक फर्म फॉरेस्टर रिसर्च की मानें तो 2009 में अमेरिकी कंपनियों का आईटी सेवाओं और वस्तुओं पर होने वाला खर्च 3.1 फीसदी तक गिर सकता है। पहले इसमें 1.6 फीसदी तक के इजाफे की उम्मीद थी।
गार्टनर का भी कहना है कि इस साल आईटी पर होने वाला कुल खर्च 3.2 लाख करोड़ डॉलर रह सकता है, जो 2008 में आईटी पर खर्च हुए 3.4 लाख करोड़ डॉलर के मुकाबले 3.8 फीसदी कम होगा।
फॉरेस्टर रिसर्च के उपाध्यक्ष और प्रमुख विश्लेषक एंड्रयू बार्टेल्स के का कहना है कि, ‘कर्ज की कमी की वजह से कंपनियों को अब भी पूंजी निवेश में कटौती करनी पड़ रही है। इसलिए वे अब आईटी वस्तुओं और सेवाओं पर भी खर्चे कम कर रही हैं। इससे 2009 तक ज्यादातर आईटी वेंडरों की कमाई पर असर पड़ सकता है।’
गार्टनर के उपाध्यक्ष (शोध) और वैश्विक पूर्वानुमान के प्रमुख रिचर्ड गॉर्डन भी उनसे इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है कि, ‘आज की तारीख में कारोबारी और उपभोक्ता दोनों अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में एक ऐसी मंदी आ सकती है, जो 2001 के संकट भी ज्यादा बड़ी होगी।’
2001 में इंटरनेट की दुनिया के बड़े-बड़े नामों के धराशायी होने बाद आईटी सेवाओं और वस्तुओं की मांग में 2.1 फीसदी की गिरावट आ सकती है। गार्टनर का यह भी कहना है कि हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, आईटी सेवा और टेलीकम्युनिकेशन सबकी हालत तो पस्त है, लेकिन सॉफ्टवेयर उद्योग में तरक्की बरकरार रहेगी।
जहां तक ऑउटसोर्सिंग की बात है, तो फॉरेस्टर रिसर्च के मुताबिक इस साल और अगले साल विकास की दर ठीक-ठाक ही रहेगी। उसके मुताबिक आर्थिक अनिश्चितता, गलाकाट प्रतिस्पध्र्दा, छोटी परियोजनाओं के दामों में कटौती और मंदी पहली छमाही तक जारी रहने की आशंका है। इसके मुताबिक कमाई में इजाफा दूसरी छमाही और 2010 में ही शुरू हो पाएगा।