केंद्रीय औषधि नियामक ने म्यूकरमाइकोसिस के उपचार में इस्तेमाल होने वाली फंगलरोधी दवा एम्फोटेरिसिन बी के विनिर्माण के लिए 5 दवा कंपनियों के आवेदन को मंजूरी दी है। हालांकि रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मांडविया सभी आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने बुधवार को दवा कंपनियों के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जिसके तहत एम्फोटेरिसिन बी की उपलब्धता बढ़ाने की बात कही गई थी।
विभिन्न राज्यों में म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण के बढ़ते मामलों और उनके उपचार के लिए दवाओं की कमी को देखते हुए यह पहल की गई है। राजस्थान ने म्यूकरमाइकोसिस अथवा ब्लैक फंगस को पहले ही महामारी घोषित कर दिया है। राज्य में ब्लैक फंगस के संक्रमण के 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्र सरकार ने भी म्यूकरमाइकोसिस को महामारी रोग अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक उल्लेखनीय बीमारी के रूप में घोषित किया है। जबकि दिल्ली सरकार ने इस दवा के वितरण की निगरानी के लिए एक समिति गठित की है।
एम्फोरेरिसिन बी एक इंजेक्शन है जिसकी बिक्री फिलहाल ऐबट, भारत सीरम्स, सिप्ला, सन फार्मा और वियाट्रिस जैसी दवा कंपनियां कर रही हैं। एलेंबिक, एमक्योर और नैटको सहित कई दवा कंपनियों ने इस दवा के विनिर्माण के लिए मंजूरी मांगी थी।
औषधि उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन का उत्पादन लिपोसोमल प्रौद्योगिकी के जरिये किया जाता है। इस इंजेक्शन का उत्पादन चक्र 25 से 28 दिनों का है। इसमें स्टर्लिटी परीक्षण करने की आवश्यकता होती है और उसके बाद ही तैयार माल को वितरण के लिए भेजा जा सकता है। हालांकि मौजूदा विनिर्माता भी उत्पादन बढ़ा रहे हैं लेकिन नई मंजूरियों से इसकी उलब्धता कहीं अधिक बढ़ेगी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल होने वाली सभी दवाओं की प्रक्रियाओं पर तेेजी से निगरानी रख रहा है ताकि उसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।’
एलेंबिक फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी आरके बाहेती ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी अब ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई), पैकेजिंग सामग्री आदि की आपूर्ति के लिए तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत कर रही है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कंपनी इस दवा का उत्पादन और आपूर्ति कब तक शुरू करेगी।
सन फार्मा ने एक बायन में कहा, ‘हमने लैम्बिन बी इंजेक्शन (लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी) का उत्पादन बढ़ा दिया है ताकि अतिरिक्त मांग को पूरा किया जा सके। हम उन्नत प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए आश्वस्त हैं।’
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एम्फोटेरिसिन बी के मासिक उत्पादन में तिगुना वृद्धि की गई है। करीब 3,80,000 शीशियां उत्पादन के चरण में हैं जबकि 3,00,000 शीशियों का उत्पादन किया जा रहा है। इस प्रकार देश में इस दवा की कुल 6,80,000 शीशियां उपलब्ध होंगी।