और फैलेगा टैक्स का जाल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 11:16 PM IST

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की नई अधिसूचना की वजह से अब टैक्स वसूली का दायरा बढ़ सकता है। इस नई अधिसूचना की वजह से अब छोटे सेवा प्रदाताओं को भी टैक्स भरना पड़ सकता है।
एक अप्रैल से लागू हो चुकी इस अधिसूचना के तहत अब टीडीएस फॉर्म में उस व्यक्ति के परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) का उल्लेख करना जरूरी है, जिसके आय के स्रोत पर से ही टैक्स काटा जा चुका है। अगर फॉर्म में पैन का उल्लेख नहीं होगा, तो फॉर्म अमान्य करार दे दिया जाएगा।
एक अप्रैल से पहले तक छोटे सेवा प्रदाताओं की सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए उनके पैन के बारे जानकारी देना जरूरी नहीं होता था। अर्नेस्ट एंड यंग में साझीदार समीर कानाबार का कहना है कि, ‘इससे टैक्स का दायरा तो बढ़ जाएगा, लेकिन इसकी वजह से करदाताओं को अब लालफीताशाही से भी जूझना पड़ेगा।’
पैन के साथ-साथ इस व्यवस्था के तहत हर भुगतान के लिए एक खास ट्रांजैक्शन नंबर (यूटीएन) को भी जारी किया जाएगा। पैन और यूटीएन का मतलब यह है कि हर भुगतान का रिकॉर्ड होगा और कंपनियां इन भुगतानों पर कर्ज की भी मांग कर सकती हैं। भारतीय कर भुगतान प्रणाली के तहत करदाता टैक्स चुकाते वक्त पहले से चुकाए गए कर को काट सकते हैं।
कानाबार का कहना है कि इन दो नंबरों (पैन और यूटीएन) की मदद से कर विभाग उन लोगों को भी पकड़ सकते हैं, जो टैक्स तो काट चुके हैं, लेकिन सरकार को उसका भुगतान नहीं किया है। इस अधिसूचना का मतलब यह हुआ कि अब टीडीएस के तहत टैक्स काटने वालों को, फिर चाहे वे छोटे हों या बड़े, सिर्फ इलेक्ट्रोनिक माध्यमों से ही कर को भरना होगा।
पहले छोटे स्तर पर काम करने वालों को इलेक्ट्रोनिक माध्यमों से टैक्स भरने के प्रावधान में छूट दी गई थी। अगर इस अधिसूचना छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए मुसीबत का सबब बनकर आई है, तो इसने बड़ी कंपनियों को भी राहत भरी खबर सुनाई है। इसके तहत अब बड़ी कंपनियां के लिए टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है।
इन बड़ी कंपनियों को सैलरी, किराया और कंसल्टिंग फीस के तौर पर कई मामलों में टैक्स चुकाना पड़ता है। इससे पहले कंपनियों को अलग-अलग श्रेणियों (फिर चाहे वे सैलरी हों या किराया) के तहत टैक्स चुकाना पड़ता था। लेकिन इस अधिसूचना की वजह से अब ये कंपनियां एक साथ ही सारे टैक्स चुका सकती है।

First Published : April 4, 2009 | 6:04 PM IST