देश की तीन सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनियों के ऊपर तेल और एयरपोर्ट कंपनियों के 4,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम बकाया है।
इस रकम का भुगतान तो उन्हें 31 मार्च तक ही करना था। विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक इस बार एयरलाइंस कंपनियों को 4,000 करोड़ का मोटा-ताजा परिचालन घाटा हो सकता है।
मोटे बकाये से तंग आकर तेल कंपनियां तो अब पैसे वसूलने के लिए तरह-तरह के रास्ते अपनाने के बारे में गंभीरता के साथ विचार कर रही हैं। इसके लिए पहले तो वे ईंधन मुहैया करवाने से पहले ही पैसों की मांग करेंगी।
साथ ही, आखिरी रास्ते के तौर पर वे अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकती हैं। लेकिन, एयरपोर्ट डेवलपरों के पास एयरलाइंसों के पीछे भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इस बारे में तो सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।
नागरिक उड्डयन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, ‘हम बकाया पैसों के भुगतान के बारे में निजी एयरलाइंस कंपनियों को सुझाव तो दे नहीं सकते। हम तो बस यह देख सकते हैं कि कैसे एयर इंडिया अपने बकाये को चुकाएगी?’
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), इंटरनैशनल एयरपोर्ट लि. और जीएमआर हैदराबाद इंटरनैशनल एयरपोर्ट लि. सहित कई एयरपोर्ट कंपनियों के अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इन तीन एयरलाइंसों के ऊपर उनके करीब 1,250 करोड़ रुपये की रकम बकाया है।
साथ ही, तेल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक इन एयरलाइंस कंपनियों के ऊपर उनके करीब 2,500 करोड़ रुपये बकाया हैं। आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक ईंधन का बिल नहीं चुकाने के मामले में विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस सबसे आगे है।
किंगफिशर एयरलाइंस के ऊपर उनके करीब 1200 करोड़ रुपये बकाया हैं। इस बीच एटीएफ की कीमतें अगस्त के मुकाबले अप्रैल में 58 फीसदी तक कम हो चुकी हैं। अगस्त में कीमत सबसे ज्यादा थीं और यही वह वक्त जिसका बिल एयरलाइंस कंपनियों ने अब तक नहीं भरा है।
एएआई के अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट का बिल नहीं चुकाने के मामले में सबसे आगे एयर इंडिया है। इन एयरलाइंसों का मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा के ऊपर दिसंबर में 80 करोड़ रुपये की रकम बकाया थी, जो आज बढ़कर 100 करोड़ रुपये से ऊपर जा चुकी है।