लार्ज-कैप में शामिल होगी अदाणी टोटाल, अपोलो हॉस्पिटल्स, चोला

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 4:28 AM IST

अदाणी टोटाल, अपोलो हॉस्पिटल्स, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट उन शेयरों में शामिल हैं जिनके म्युचुअल फंड (एमएफ) लार्जकैप श्रेणी में शामिल होने की संभावना है। ये बदलाव एमएफ उद्योग संगठन एम्फी द्वारा जुलाई के पहले सप्ताह में होने वाली छमाही समीक्षा बैठक में होने की संभावना है।
आईआईएफएल सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष श्रीराम वेलायुधन द्वारा कराए गए विश्लेषण के अनुसार, इस बीच, पेट्रोनेट एलएनजी, पीआई इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) लार्जकैप श्रेणी से निकल कर मिडकैप में जा सकती हैं।
मिडकैप श्रेणी से भी एक दर्जन से ज्यादा शेयर बाहर हो सकते हैं और वे स्मॉलकैप में जा सकते हैं।
वर्ष 2017 में, बाजार नियामक सेबी लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप के लिए कई मानक पेश किए थे। इसके तहत, कुल बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में शीर्ष-100 कंपनियों को लार्जकैप का दर्जा दिया गया जिसके बाद की 150 कंपनियों को मिडकैप सेगमेंट और शीर्ष 250 से अलग कंपनियों को स्मॉलकैप समझा जाता है।
म्युचुअल फंडों के उद्योग संगठन एम्फी को हरेक 6 महीने के औसत बाजार पूंजीकरण के आधार पर रैंक की गणना करने का कार्य दिया गया है। जुलाई में इससे संबंधित होने वाला बदलाव जनवरी-जून 2021 के शेयर प्रदर्शन पर आधारित होगा।
इक्विटी म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं को इन बदलावों के तहत अपनी होल्डिंग को पुन: संतुलित बनाना होगा। सामान्य तौर पर, इन बदलावों की वजह से होल्डिंग में ज्यादा अंतर नहीं आता है, जैसा कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंंडों (ईटीएफ) के मामले में देखा गया है। ज्यादा सक्रिय-प्रबंधित योजनाओं में अन्य श्रेणी के शेयरों की सूची में शामिल होने की पर्याप्त गुंजाइश होती है।
उदाहरण के लिए, किसी लार्जकैप इक्विटी योजना को अपनी कुल राशि का न्यूनतम 80 प्रतिशत हिस्सा लार्जकैप कंपनियों में लगाने की जरूरत होती है। इससे फंड प्रबंधकों को उस स्थिति में शेयरों में बने रहने की पर्याप्त संभावना रहती है, जब वे लार्जकैप श्रेणी से बाहर निकल जाते हैं। इसी तरह, मिडकैप और स्मॉलकैप योजनाओं को अपनी श्रेणी में आने वाले शेयरों में न्यूनतम 65 प्रतिशत निवेश की जरूरत होती है।
हालांकि जिन 6 शेयरों को लार्जकैप श्रेणी में शामिल किए जाने की संभावना है, वे मौजूदा समय में इक्विटी फंड प्रबंधकों के स्वामित्व में हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे लार्जकैप योजनाओं द्वारा कुछ हद तक खरीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। लार्जकैप योजनाएं इक्विटी सेगमेंट की सबसे बड़ी उप-श्रेणी में से एक है।

First Published : May 25, 2021 | 9:04 PM IST